गाजियाबाद
हाजी सलमान का केस न लड़ने की अपील पर घिरे विधायक नंदकिशोर
कुंवर अय्यूब अली ने दिखाया आईना, बोले यह पुलिस-प्रशासन नहीं, न्यायपालिका है; गुर्जर समाज में भी उठने लगे विरोध के सुर
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद। हाजी सलमान प्रकरण को लेकर लोनी की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। लोनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों से कथित आरोपी हाजी सलमान का मुकदमा न लड़ने की अपील किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर विधायक को तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। मामले ने अब राजनीतिक के साथ-साथ अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नयी बहस छेड़ दी है।
विधायक की अपील पर गाजियाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नेता कुंवर अय्यूब अली ने सीधे विधायक पर निशाना साधते हुए उन्हें आईना दिखाया। उन्होंने टिप्पणी की, “यह आपका प्रशासन और पुलिस नहीं है, जो आपके दबाव में काम करे। यह न्यायपालिका है, जो निष्पक्ष रूप से कार्य करती है।” अय्यूब अली की इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर विधायक की कार्यशैली पर सीधा सवाल माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हाजी सलमान की जमानत याचिका में अधिवक्ता कामिल खान, आसू चौधरी, इमरान, नदीम अख्तर और मुजीबुर्रहमान सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अपना वकालतनामा दाखिल किया है। इसे अधिवक्ताओं द्वारा अपनी पेशेवर स्वतंत्रता के तहत पैरवी करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विधायक के बयान पर भी उठे सवाल
इसी बीच सामने आए एक वीडियो में विधायक नंदकिशोर गुर्जर न्यायालय परिसर से जुड़े एक समुदाय के कुछ लोगों के लिए “जिहादी” शब्द का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में विधायक यह कहते हुए भी सुनाई देते हैं कि अधिकांश लोग एकत्रित थे और बार अध्यक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने घटना को मारपीट के बजाय दुराचार से जुड़ा मामला बताया तथा कथित तौर पर कुछ लोगों को “सेकुलर” कहकर उन पर भी टिप्पणी की।
विधायक के इन बयानों को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि किसी आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले संबंधित पक्षों और समुदायों को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कितना उचित है।
बड़ी संख्या में वकीलों की मौजूदगी भी चर्चा में
मामले में बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय से जुड़े अधिवक्ताओं के न्यायालय में मौजूद रहने और हाजी सलमान के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए समर्थन जताने की बात भी सामने आई है। इससे यह संदेश गया कि मामला केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच भी इसको लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
विधायक की अपील के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। दीपक शर्मा नामक यूजर ने टिप्पणी करते हुए इसे चुनावी ध्रुवीकरण से जोड़ते हुए लिखा कि “सब प्रायोजित है, चुनाव को पूरी तरह हिंदू-मुस्लिम के बीच बांटना है, सब प्लानिंग के तहत हो रहा है।”
अधिवक्ता आशा कुशवाहा ने लिखा, “अगर मेरे पास आएगा तो मैं भी लड़ूंगी उसका केस।” राकेश मिश्रा ने इसे “खुली गुंडागर्दी” बताया, जबकि सुशील कुमार शर्मा ने टिप्पणी की कि “वकील किसी का नौकर नहीं है।” एक अन्य यूजर ने विधायक पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “चार दिन की जिंदगी में इतना नशा।”
अब गुर्जर समाज में भी उठने लगे विरोध के सुर
सबसे अहम बात यह है कि विधायक की बयानबाजी और हाजी सलमान प्रकरण को लेकर अब उनके अपने गुर्जर समाज के बीच से भी विरोध के स्वर उठने की चर्चा सामने आ रही है। राजनीतिक हलकों में इसे विधायक के लिए असहज स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। कुंवर अय्यूब अली की मुखर प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
फिलहाल हाजी सलमान प्रकरण में अदालत की कार्यवाही अपने स्तर पर जारी है। ऐसे में विधायक की अपील और उसके बाद अधिवक्ताओं एवं सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या किसी आरोपी की पैरवी करने या न करने का फैसला राजनीतिक अपील से तय होगा या अधिवक्ता अपनी पेशेवर स्वतंत्रता के अनुसार निर्णय लेंगे?
हालांकि, सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां संबंधित यूजर्स की व्यक्तिगत राय हैं

