भारतीय मुक्केबाजों ने लगाई गोल्डन हैट्रिक, कुश्ती में सुजीत का कमाल
आखिरी डेढ़ मिनट में पलटी बाजी, 10 सेकंड में दो अंक लेकर जीता सोना

आइची नागोया । सुजीत कलकल ने पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुदिएव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। एक समय वह 2-9 से पीछे थे, लेकिन आखिरी दो मिनट में चार टेकडाउन के जरिए वापसी की और अंतिम 10 सेकंड में मिले दो अंकों से मुकाबला पलट दिया।
भारत के सुजीत कलकल ने एशियाई खेलों में कुश्ती का स्वर्ण पदक जीत लिया है। पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में सुजीत ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुदिएव को 10-9 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। मुकाबले में एक समय सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी दो मिनट में उन्होंने ऐसा पलटवार किया कि मुकाबले का पूरा रुख बदल गया। पहले राउंड के बाद सुजीत 2-4 से पीछे थे। दूसरे राउंड में ताजिकिस्तान के पहलवान ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया और एक समय स्कोर 9-2 हो गया। सुजीत के लिए मुकाबला लगभग हाथ से निकलता हुआ नजर आ रहा था।
चार टेकडाउन ने बदल दी पूरी कहानी-सुजीत ने हार नहीं मानी और आखिरी दो मिनट में लगातार वापसी शुरू की। उन्होंने चार टेकडाउन किए और हर टेकडाउन से दो-दो अंक हासिल किए। इस तरह उन्होंने 2-9 के स्कोर से वापसी करते हुए मुकाबले को 8-9 तक पहुंचा दिया। अब मुकाबले में कुछ ही समय बचा था। ताजिकिस्तान के पहलवान के पास एक अंक की बढ़त थी और सुजीत को मुकाबला जीतने के लिए निर्णायक दांव की जरूरत थी।
आखिरी 10 सेकंड में आया सबसे बड़ा दांव-मुकाबले के आखिरी 10 सेकंड में सुजीत ने एक और टेकडाउन कर दिया। इसके साथ उन्हें दो अंक मिले और स्कोर 10-9 हो गया। इस तरह सुजीत ने 9-2 से पिछड़ने के बाद मुकाबला 10-9 से अपने नाम कर लिया। यह जीत सुजीत की शानदार वापसी के साथ-साथ दबाव में उनके धैर्य और सही समय पर दांव लगाने की क्षमता का भी उदाहरण रही।
एशियाड में भारत को कुश्ती का गोल्ड-सुजीत के स्वर्ण पदक को भारतीय कुश्ती के लिए भी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने 65 किग्रा वर्ग में भारत को एशियाई खेलों का स्वर्ण दिलाया है। सुजीत कलकल हरियाणा के चरखी दादरी के रहने वाले हैं और पांच नवंबर 2002 को उनका जन्म हुआ। उन्हें कुश्ती की शुरूआती प्रेरणा अपने पिता दयानंद कलकल से मिली, जो राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं।
बजरंग के बाद 65 किग्रा में बनाई पहचान-सुजीत ने 65 किग्रा वर्ग में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाई है। इस भार वर्ग में उन्होंने अंडर-20 और अंडर-23 स्तर पर एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते हैं। 2025 में उन्होंने सर्बिया के नोवी साद में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण भी जीता था। फाइनल में उन्होंने उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को 10-0 से हराया था। 2026 में सुजीत ने सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा उन्होंने ग्रां प्री और रैंकिंग सीरीज में भी स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। अब एशियाई खेलों के स्वर्ण के साथ सुजीत ने सीनियर स्तर पर अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ा पदक जोड़ लिया है।



