रामलीला में रावण जन्म और वेदवती प्रसंग का मंचन
राक्षसों के अत्याचार का जीवंत मंचन देख भावविभोर हुए दर्शक

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
शामली। शहर के मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम पर चल रहे 57वें रामलीला महोत्सव में सोमवार देर रात रावण जन्म, रावण-वेदवती संवाद तथा साधु-संतों पर राक्षसों के अत्याचार का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
मंचन में दिखाया गया कि रावण, कुंभकरण और विभीषण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने तीनों को वरदान प्रदान किए। रावण ने अमरता का वरदान मांगा, जबकि कुंभकरण को छह माह सोने और छह माह जागने का वरदान मिला। विभीषण ने प्रभु की भक्ति का वरदान मांगा।
इसके बाद रावण और वेदवती संवाद का मंचन किया गया। रावण द्वारा वेदवती को परेशान किए जाने तथा वेदवती द्वारा रावण को श्राप देने का प्रसंग भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। वेदवती ने रावण को श्राप दिया कि अगले जन्म में वह उसके सर्वनाश का कारण बनेगी। इसके बाद वेदवती के प्राण त्यागने का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया।
रामलीला के अगले प्रसंग में राक्षसों द्वारा साधु-संतों को यातनाएं देने, यज्ञ में विघ्न डालने और यज्ञ भंग करने के दृश्यों का मंचन हुआ। कलाकारों की संवाद अदायगी और अभिनय की दर्शकों ने सराहना की।
इस अवसर पर प्रधान सलिल द्विवेदी, राजकुमार मित्तल, शरद द्विवेदी, पुनीत द्विवेदी, मुकुल द्विवेदी, लाल सिंह लचक, पंडित दिनेश पाठक, आदेश शर्मा, उत्तम नामदेव, वंश नामदेव, रमेश धीमान, सुखचैन वालिया, निकुंज मित्तल, रोहित संगल, नमन करनवाल आदि मौजूद रहे।
