फर्जी लेटर हेड के आधार पर पूर्व सीएमएस पर लगाए गए आरोपों का अस्पताल प्रशासन ने किया खंडन
नोएडा जिला अस्पताल की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई सफाई

नोएडा : जिला अस्पताल, नोएडा की पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रेनू अग्रवाल पर लगाए गए कथित आरोपों को लेकर अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आधिकारिक खंडन जारी किया है। प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मीडिया में चल रही खबरों को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में साफ किया गया कि अस्पताल में टेंडर की सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार के ‘जेम पोर्टल’ (GeM Portal) के माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपन्न की गई हैं। जनरेटर, लिफ्ट और अन्य तकनीकी उपकरणों की खरीद मूल निर्माता (OEM) द्वारा अधिकृत फर्मों से ही की गई, जिससे अनियमितता की कोई संभावना नहीं रही।
फर्जी लेटर हेड बना विवाद की जड़
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कुछ शरारती तत्वों ने फर्जी लेटर हेड का इस्तेमाल कर पूर्व सीएमएस पर अनियमितताओं के आरोप लगाए और उन्हें कुछ समाचार माध्यमों द्वारा बिना पुष्टि के प्रकाशित किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिस पत्र को आधार बनाया गया है उसमें यह तक स्पष्ट नहीं है कि शिकायत किस व्यक्ति ने, किससे और किस स्तर पर की है।
शासन स्तर से हुई निगरानी
अस्पताल की वर्तमान सीएमएस की ओर से कहा गया कि सभी निविदाएं शासन स्तर की निगरानी में की गईं, और उनमें किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रही।
“सभी निविदाएं शासन स्तर से निगरानी में पूरी की गईं और किसी भी स्तर पर अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं रही है। आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे हैं।”
— डॉ. रेनू अग्रवाल, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, नोएडा
प्रशासन ने मीडिया से बरती जाने वाली सतर्कता की अपील की प्रेस विज्ञप्ति में यह भी अपील की गई कि मीडिया संस्थान सत्यापन के बाद ही किसी खबर को प्रकाशित करें, ताकि शासन और अस्पताल प्रशासन की छवि को धूमिल करने के प्रयासों को रोका जा सके।



