गाजियाबादमोदीनगर

नायब तहसीलदार मोदीनगर का अजब कारनामा ! अधिवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप।

एक ही भूमि के दो नामन्तरण आदेश पारित किए।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय वशिष्ट ने नायब तहसीलदार पर लगाए गंभीर आरोप।

मोदीनगर। नायब तहसीलदार मोदीनगर के द्वारा एक ही भूमि के दो नामन्तरण आदेश पारित किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।  पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता विजय वशिष्ठ ने बताया कि मोदीनगर तहसील क्षेत्रांर्न्तगत ग्राम नहाली में विक्रेतागण अबरार रकबा 0.0341 है0, इस्तेकार रकबा 0.0341 है0, जुबेदा रकबा 0.0345 है0, जुल्फेकार रकबा 0.0341 है0, रिहाना रकबा 0.0341 है0, सायबा रकबा 0.0341 है0, पुत्र/पुत्री/पत्नी मुबारक अली सभी ने अपना सम्पूर्ण भाग 0.2050 है0 खसरा नम्बर 87 क्रेता दिनेश कुमार गोयल पुत्र राजेन्द्र निवासी मोदीनगर को सब रजिस्ट्रार कार्यालय मोदीनगर में गत 5 फरवरी को विक्रय कर दिया था। उक्त बैनामे के बाबत नामान्तरण हेतू वाद योजित था, खतौनी मे कुछ कमी के कारण वाद निरस्त कर दिया गया। वादी ने प्रतिवादीगणों से सम्बन्धित समस्या बताई तो उक्त समस्या के निदान के बाद पिड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने गत 18 अगस्त को पुर्नस्थापना पत्र प्रस्तुत किया, इसी बीच विक्रेतागणों में से एक हिस्सेदार रिहाना पुत्री मुबारक अली ने एक फर्जी विक्रय पत्र अपने रकबे 0.0341 है0 में से रकबा 0.0253 है0 गत 16 मई को सायरा पत्नी हसरत के पक्ष कर दिया तथा दुसरे पक्ष ने नायाब तहसीलदार मोदीनगर मुकेश शर्मा से साज कर अपने पक्ष में नामान्तरण के आदेश पारित करा लिये।
यहां देखने वाली बात यह है कि नायब तहसीलदार मुकेश शर्मा के द्वारा पीड़ित पक्ष के समर्थन में भी गत 27 अगस्त को नामांन्तरण आदेश पारित कर दिये, विक्रेतागणें का कुल रकबा 0.2050 है0 है किन्तु नायब तहसीलदार महोदय ने पीड़ित पक्ष के हक में 0.2050 है0 और दुसरे पक्ष के हक में 0.0253 है0 भूमि के नामान्तरण आदेश तो पारित कर दिये किन्तु नायब सहाब भुल गये कि अब 0.0253 है0 भूमि पक्षकारों को कहां से देगें।
उपरोक्त सभी तथ्यों को देखा जाये तो स्पष्ट ज्ञात होता है कि यह कोई लिपिकय त्रुटि नही बल्कि सोची समझी साजिश के साथ रिहाना व सायरा ने नायब तहसीलदार मोदीनगर मुकेश शर्मा के साथ साज कर उक्त काम को अजाम दिया गया है क्योकि सायरा बनाम रिहाना का दाखिल खारिज केवल 45 दिन में किया गया है। जबकि जो र्निविवाद फाईल है वह लम्बे समय तक लंबित रहती है, अधिवक्ता चक्कर काट-2 कर थक जाते है किन्तु कोई भी नामांन्तरण समय पर दर्ज नही किया जाता, किन्तु संदिग्ध नामांन्तरण पर अत्यंन्त शीघ्र आदेश पारित कर दिये जाते है। उपरोक्त आदेश को अपास्त कराने केे लिए अधिवक्ता वशिष्ठ के द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। अधिवक्ता विजय वशिष्ठ आगे बताते है कि उन्होने इस मामले मे मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्व परिषद को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है, क्योकि अधिकारियों के कारनामो से सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
जब इस बारे में उप जिलाधिकारी अजीत सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि भूल वश ऐसा हो गया है मामला संज्ञान में आने के बाद बाद वाले बैनामे का नामांतरण निरस्त कर दिया गया है।

 

 

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