सिंगरौली
बन्दूक की नोक पर कोतवाली थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े 50 हज़ार की लूट
सत्ताधारी पार्षद के दबाव में आरोपियों को छोड़ने के पुलिस पर लगे आरोप

विधायक, महापौर और अध्यक्ष के बंगले के सामने बनी मंडी में बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौजी इलाके में एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके जहाँ विधायक, महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष के बंगले स्थित हैं उसी के ठीक सामने बनी कृषि उपज मंडी की एक दुकान में दिनदहाड़े 50 हज़ार रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
फरियादी के मुताबिक, दो नकाबपोश युवक मोटरसाइकिल से आए और दुकान में घुसते ही व्यापारी को धमकाया। इसके बाद उन्होंने कैश काउंटर में रखे करीब 50 हज़ार रुपये जबरन निकाल लिए और भाग निकले। व्यापारी ने तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को पकड़ भी लिया लेकिन हैरानी की बात तब सामने आई जब सूत्रों से जानकारी मिली कि आरोपियों को कुछ ही देर बाद थाने से ‘रिहा’ कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि यह सब सत्ताधारी दल के एक पार्षद के दबाव में हुआ, जिनका नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यही पार्षद पहले भी दलाली और विवादित कामों में शामिल रहे हैं, लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई व्यापारी वर्ग में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों के घरों के सामने ऐसी वारदात हो सकती है और पुलिस राजनीतिक दबाव में आरोपियों को छोड़ सकती है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करे? स्थानीय व्यापारियों ने कोतवाली पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, घटना के बाद से इलाके में पुलिस की गश्त तो बढ़ाई गई है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह केवल दिखावा है। इस मामले में जब पुलिस अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने औपचारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं सूत्रों का कहना है कि मामले को ‘ऊपर से दबा’ देने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि राजनीतिक प्रतिष्ठा पर आंच न आए। गौरतलब है कि बिलौजी क्षेत्र में पहले भी कई बार चोरी और लूट जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में अपराधियों पर कार्रवाई आधी-अधूरी रह जाती है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



