छह साल बाद भी असम एनआरसी प्रक्रिया अधर में
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा स्पष्टीकरण।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की प्रक्रिया को लेकर चल रही अनिश्चितता पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को केंद्र सरकार, असम सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर छह साल से लंबित प्रक्रिया पर जवाब मांगा है।न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंहा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंद्रचूड़ की पीठ ने सवाल उठाया कि अगस्त 2019 में अंतिम एनआरसी सूची प्रकाशित होने के बाद भी आगे की प्रक्रिया क्यों नहीं बढ़ाई गई। अदालत ने संबंधित विभागों को हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। यह नोटिस जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) की याचिकाओं पर जारी किया गया। याचिकाओं में केंद्र और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को नागरिकता (पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने) नियम, 2003 के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने की अपील की गई थी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, इंदिरा जयसिंग और फुजैल अहमद अय्यूबी ने दलीलों में कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल 3 करोड़ 11 लाख लोगों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी नहीं किया है। साथ ही, लगभग 19 लाख लोगों को जो सूची से बाहर रह गए, उन्हें अस्वीकृति पत्र भी नहीं मिला, जिससे वे विदेशी न्यायाधिकरण में अपील नहीं कर पा रहे हैं। याचिकाओं में कहा गया, “यह न केवल संवैधानिक प्रक्रियाओं की अवहेलना है बल्कि अवैध प्रवास से संबंधित चिंताओं के समाधान के लिए खर्च हुए 1,600 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि की बर्बादी भी है।” याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि एनआरसी प्रक्रिया के पूर्ण होने से ही असम अपनी सामाजिक और जनसांख्यिकीय अखंडता की रक्षा कर सकेगा और सभी नागरिकों के लिए समानता सुनिश्चित हो पाएगी।



