मुरादाबाद
सूत्रों के हवाले से खबर अनियमितताओं के चलते बन रही छजलैट से कांठ को जाने वाली सड़क
बेहद ईमानदार दर्शाने वाले अधिशासी अभियंता के क्षेत्र अंतर्गत हो रहा सड़क निर्माण
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। पीडब्ल्यूडी द्वारा करोड़ों की लागत से छजलैट से कांठ को जाने वाली हाॅटमिक्स द्वारा कोलतार की सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है सूत्रों हवाले से मिली जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है दांयी साइड कोलतार की एक पतली लेयर रेलवे फाटक से तहसील बार एसोसिएशन के गेट तक डाल दी गई है और बांयी साइड में सेम लेयर डालने के बाद अब रेलवे फाटक से लेकर मासूम फर्नीचर के सामने तक दूसरी लेयर डालकर सड़क को मिला दिया गया है। और आगे की तैयारी पहले के अनुसार जारी है पता चला है कि जिस ठेकेदार को यह काम मिला है वह बाहर का है उसने काम करने के लिए लेवर को छोड़ रखा है सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार की अधिशासी अभियंता से सेटिंग हो चुकी है इसलिए ही सड़क का निर्माण कराने के दौरान किसी अधिकारी द्वारा सड़क से संबंधित किसी चीज की गुणवत्ता को चेक नहीं किया जा रहा है बस आंख बंद करके कार्य हो रहा है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सड़क निर्माण का कार्य अपने आप को बेहद ईमानदार दर्शाने वाले अधिशासी अभियंता के क्षेत्र अंतर्गत हो रहा है यदि इस सड़क के एस्टीमेट और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले मेटेरियल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों की जांच हो जाये तो करोड़ों रुपए का गड़बड़ झाला सामने आ जायेगा।
क्षेत्रवासी क्या कहते हैं
सड़क के निर्माण को लेकर फुरकान अली का कहना है कि बार बार सड़क टूट जाती है यह सड़क मुरादाबाद मार्ग से कांठ होते हुए नजीबाबाद हरिद्वार तक जाती है और इस पर 24 घंटे भारी वाहनों का आवागमन रहता है इतनी पतली सड़क डाली जाती है जो एक बारिश भी नहीं झेल पाती अधिकारियों को बस अपना पेट भरना है
राजवीर सिंह कहते हैं कि इतनी जानकारी तो हम भी रखते हैं कि पहले सड़क कितनी मोटी बनती थी और अब कितनी पतली बन रही है सड़क देखने में मोटी लगे इसलिए साइडों से कोलतार ऊपर चढ़ा दिया जाता है और बाकी पूरी सड़क में पतला माल ही डाला जाता है सब जानते हैं कि ये सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी हो रही है। और अपनी जेब भरी जा रही है पर कोई ज्यादा बोलेगा तो ठेकेदार आकर लड़ने को तैयार हो जायेंगे।
बहरहाल सड़क ठीक से बन रही है या नहीं गुणवत्ता ठीक है या नहीं ये तो गंभीर जांच के बाद ही पता चलेगा।
परंतु अब तक की मिली जानकारी से लगता है कि पीडब्ल्यूडी भी सरकारी धन का बंदरबांट करने में पीछे दिखाई नहीं दे रहा है।





