ललितपुर

मुशायरे में शायरों ने पढ़े उम्दा कलाम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था वान ए गजल मध्य प्रदेश के तत्वाधान में कौमी एकता एवं मुशायरा का कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी बदरूद्दीन कुरैशी ने की। जबकि मुख्य अतिथि राज्यमंत्री मनोहर लाल ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को गति दी। पश्चात उज्जैन की नौजवान शायर नवाज असीमी ने नाते पाक एवं मनीष अंजुम सोनी ने सरस्वती वंदना पढ़कर कार्यक्रम का आगाज किया। इस मौके पर नगर के शायर व गीतकार करीम असर ललितपुरी की साहित्यिक 50 वर्षों की सीमाएं एवं देश-विदेश में जिले का नाम रोशन करने के लिए संस्था की ओर से शासन की राज्यमंत्री ने शाल उड़ाकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर नैनीताल से आए कवि मोहन ने शेर पढ़ते हुए कहा कि पांव दाबू मां बाप के तो खुशी मिले, बैसूद दुनिया पे चलने से फायदा क्या। झांसी के शायर जब्बार शारिब ने कुछ यूं कहा कि मैं तो सूरज हूं कभी रात में नहीं, निकलता वह मुझसे मिलने मगर दिन में भी नहीं आती। नोमान के शायर हाशिम नोमानी ने कहा कि कब्र के अंदर भी तो चैन नहीं मिलता कब्र के अंदर भी जिंदा रहना पड़ता है। सूफयानी काजी ने कहा एल्म और तहजीब का खजाना है, जिससे रोशन गरीब खाना है। प्रतापगढ़ से राजीव राज ने कहा कि अभी भी वक्त के गुलेल में हूं अजब बात है कि कैसे खेल में हूं वह कत्ल करके भी संसद भवन में बैठे हैं। मैं एक रोटी चुरा के तिहाड़ जेल में हूं। एमआर सोज ने कहा कि रेजा रेजा विखर गया हूँ, मै अपने साये से डर गया हूं। असर ललितपुरी ने कहा शहर में दुश्मन के बार क्या करते हम ने तलवार दिखाई रख ली। मौके पर अबरार दानिश महिदा, असरार चंदे, रवि मंजर भोपाली ने भी कार्यक्रम में खूब भी वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के प्रारंभ में यही ललितपुरी ने अतिथियों को वैच लगा कर सम्मानित किया। इस दौरान मनमोहन संज्ञा, भारत राजा, विजय जैन, रविशंकर एड., अख्तर अब्दुल रहमान, कलानाथू उस्ताद, रवि शंकर, डा.शिवनारायण, आरिफ खान, मासूम कौसर सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने आभार जताया।
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