बेतुल
बैतूल एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत सामुदायिक वनाधिकार दावा पत्रों पर आज तक नहीं हुई कार्रवाई: जामवंत
मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं, बैठकें कागजों तक सीमित

ताप्ती मेघा रिचार्ज और कंज़र्वेशन रिजर्व योजनाओं के विरोध में 26 फरवरी को आंदोलन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। जयस प्रदेश संयोजक जामवन्त सिंह कुमरे ने आरोप लगाया कि भीमपुर और चुनालोमा के आदिवासी देवस्थलों से जुड़े सामुदायिक वनाधिकार दावा पत्र एक वर्ष बाद भी लंबित हैं, जबकि प्रशासन त्वरित निराकरण के दावे कर रहा है।
जयस प्रदेश संयोजक जामवन्त सिंह कुमरे ने आरोप लगाया है कि एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत किए गए सामुदायिक वनाधिकार दावा पत्रों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि प्रशासनिक बैठकों के दावे लगातार किए जा रहे हैं।
जामवन्त सिंह कुमरे ने कहा कि भीमपुर के आरक्षित वन भूमि स्थित प्राचीन आदिवासी देवस्थल मुठवा देव, वनखंड क्रमांक 1460 के लिए ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर एक हेक्टेयर भूमि का सामुदायिक वनाधिकार दावा पत्र एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद आज दिनांक तक प्रकरण लंबित है और संबंधित विभागों द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया।
– चुनालोमा के खंडरई बाबा स्थल पर अतिक्रमण
उन्होंने बताया कि चुनालोमा में आदिवासी देवस्थल मेघनाथ (खंडरई) बाबा पर प्रतिवर्ष पूजा और मेला आयोजित होता है तथा खंडरई की परिक्रमा की परंपरा है। वर्षों से स्थल पर अतिक्रमणकारी का कब्जा बना हुआ है, जिसे हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है और न ही सामुदायिक वनाधिकार का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
– मंत्रालय के निर्देशों का हवाला
जामवन्त सिंह कुमरे ने वन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के पत्र क्रमांक एफ 25-43/2006/10-3/1424 दिनांक 25 जुलाई 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व ग्राम के बाजीबुल अर्ज एवं निस्तार पत्रक से छांटकर वन भूमियों पर परंपरागत रूप से कायम रूढ़ी या निस्तार अधिकार जैसे रास्ते, चरनोई, गौठान, धार्मिक स्थल, श्मशान घाट, मड़ई मेले, खेल मैदान, सामुदायिक हाट और जलाशय को राजस्व अभिलेख, अधिकार अभिलेख एवं खसरा पंजी में दर्ज कर दखल रहित सामुदायिक भूमि का हक प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
– जिला स्तरीय बैठकों पर उठे प्रश्न
उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तर पर बैठकें आयोजित होती हैं, लेकिन परिणाम शून्य है। उनके अनुसार बैठकें केवल कागजों में सीमित हैं और आदिवासियों के नाम पर अखबारों में बयान देना मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है।
– होली से पहले भी नहीं हुई कार्रवाई
दोनों प्रकरणों में प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नगण्य है, जबकि फाल्गुन और होली के त्योहार में आदिवासी आस्था के अनुरूप मेला आयोजित होना है। प्रशासन की चुप्पी को उन्होंने धार्मिक भावनाओं से सीधा खिलवाड़ बताया।
– जांच और जवाबदेही की मांग
जामवन्त सिंह कुमरे ने आरोप लगाया कि उच्च अधिकारी कभी मूल स्थल पर पहुंचकर जांच नहीं करते और लिखित प्रतिउत्तर मांगने पर भी जवाब नहीं दिया जाता। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध दर्ज होने योग्य एफआईआर आज तक पुलिस विभाग द्वारा दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खंडरई बाबा, चुनालोमा के फाल्गुन मेले और विशेष पूजा में लगातार बाधाएं आ रही हैं, जिनका निराकरण तत्काल किया जाना चाहिए।
– 26 को होगा आंदोलन
श्री कुमरे ने बताया आदिवासियों की जमीनों पर ताप्ती मेघा रिचार्ज और ताप्ती कंज़र्वेशन रिजर्व जैसी नई योजनाओं के तहत संभावित विस्थापन, वन विभाग के कब्जे, व्यक्तिगत वनाधिकार प्रकरणों के लंबित निराकरण, कृषि संबंधी समस्याओं और बिजली समस्याओं की अनदेखी से किसानों में आक्रोश है। जयस एवं समस्त आदिवासी और सर्वसमाज के बैनर तले 26 फरवरी को आंदोलन कर प्रमुख मांगों को किसान हित में शीघ्र पूरा करने की मांग की जाएगी।



