बेतुल
बैतूल बच्चे देश का भविष्य, उनके हाथों में झाड़ू-पोछा नहीं किताबें होनी चाहिए: डीएसपी शिफा हासमी
बाल श्रम के पीछे आर्थिक और सामाजिक दोनों कारण जिम्मेदार: अनामिका तिवारी

अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर जिला पंचायत सभा कक्ष में कार्यशाला आयोजित
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर प्रदीपन संस्था बैतूल द्वारा जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के सहयोग से जिला पंचायत सभा कक्ष बैतूल में कार्यशाला आयोजित की गई। संस्था सचिव श्रीमती रेखा गूजरे के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बाल श्रम मुक्त जिला बनाने तथा बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अभिषेक जैन, आजाक थाना बैतूल की डीएसपी शिफा हासमी, महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक विवेक जैन, जिला बाल संरक्षण अधिकारी विनोद ईवने, वन स्टॉप सेंटर प्रभारी अनामिका तिवारी, लेबर इंस्पेक्टर दीपिका जीवतोड़े, विशेष पुलिस इकाई के श्यामलाल पाटील, मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद की जिला समन्वयक प्रिया चौधरी, वरिष्ठ समाजसेवी मीरा एंथोनी, समाजसेवी एवं महिला पत्रकार गौरी बालापुरे सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के शुभारंभ में संस्था सचिव श्रीमती रेखा गूजरे ने बताया कि जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क है, जिसके सहयोग से प्रदीपन संस्था बैतूल जिले में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम निषेध दिवस मनाने का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना और बच्चों को शिक्षा की ओर अग्रसर करना है। संस्था काउंसलर दीपमाला खातरकर ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बाल श्रम कानून और उसके दुष्परिणामों की जानकारी दी।
– सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
लेबर इंस्पेक्टर दीपिका जीवतोड़े ने बताया कि बाल श्रम अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है तथा ऐसा करने वालों के विरुद्ध छह माह से दो वर्ष तक के कारावास सहित सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अभिषेक जैन ने समिति की भूमिका बताते हुए कहा कि देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा बाल श्रमिक बच्चों को समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, ताकि उनका उचित पुनर्वास सुनिश्चित हो सके और वे दोबारा बाल श्रम की ओर न जाएं। उन्होंने बताया कि समिति एकल अभिभावक वाले बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजनाओं से जोड़ने तथा आधार कार्ड बनवाने में भी सहयोग कर रही है।
– बाल श्रम एक संज्ञेय अपराध
डीएसपी शिफा हासमी ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके हाथों में झाड़ू-पोछा नहीं किताबें होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक संज्ञेय अपराध है और इसके मामलों में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। शिक्षा विभाग के आदिवासी विकास प्रकोष्ठ से गौरव पवार ने बताया कि विभाग के अंतर्गत संचालित विद्यालयों के बच्चों को बाल श्रम से दूर रखने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों के साथ लगातार संवाद किया जाएगा तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे।
– शिक्षा में रुकावट नहीं बननी चाहिए दस्तावेजों की बाध्यता
वन स्टॉप सेंटर प्रभारी अनामिका तिवारी ने कहा कि बाल श्रम के पीछे आर्थिक और सामाजिक दोनों कारण जिम्मेदार हैं। आर्थिक कमजोरी, पारिवारिक असुरक्षा और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के कारण कई बच्चे बाल श्रम की ओर धकेले जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों की बाध्यता किसी भी बच्चे की शिक्षा में रुकावट नहीं बननी चाहिए। जिला समन्वयक प्रिया चौधरी ने सुझाव दिया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छोटे स्तर पर भी आयोजित की जानी चाहिए ताकि समुदाय में व्यापक जागरूकता पैदा हो सके। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 800 बीएसडब्ल्यू और एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थी हैं, जिन्हें भी बाल श्रम कानूनों के प्रति जागरूक करने के लिए संस्था से सहयोग का आग्रह किया गया है।
– जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
समाजसेवी एवं महिला पत्रकार गौरी बालापुरे ने कहा कि शराब जैसी सामाजिक बुराइयां भी बाल श्रम का एक बड़ा कारण हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के रेस्क्यू के साथ-साथ उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रभावी पुनर्वास की व्यवस्था आवश्यक है, ताकि वे दोबारा बाल श्रम की ओर न लौटें। उन्होंने विवाह समारोहों में कैटरिंग और लाइटिंग कार्यों में बच्चों के उपयोग पर भी चिंता जताते हुए ऐसे क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक चारू वर्मा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सुनील कुमार, अलका नागले, पूनम अतुलकर, ज्योति बागवे, संगीता आंजने, वंदना सावे, रवीशंकर चवारे, विशाल आर्य और लोकेश भनारिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



