बागपत

 विशेष साक्षात्कार: फौजी से फिल्म प्रोड्यूसर तक—सुनील भड़ाना का बड़ा सपना

 “भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” का 1 मई 2026 को भव्य शुभारंभ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत : देश सेवा के 22 वर्षों के अनुशासन और संघर्ष को पीछे छोड़कर अब एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं सुनील भड़ाना। अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ अब वे अपने “भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” के माध्यम से क्षेत्रीय कलाकारों को एक बड़ा मंच देने जा रहे हैं। 1 मई 2026 को इस प्रोडक्शन हाउस का भव्य उद्घाटन प्रस्तावित है।
 साक्षात्कार
 प्रश्न 1: सुनील जी, आप फौजी, लेखक और अब प्रोड्यूसर—इतने विविध क्षेत्रों में आपकी पहचान है। इस सफर को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: मेरा मानना है कि जीवन एक ही रास्ते पर रुकने के लिए नहीं बना। फौज ने मुझे अनुशासन, धैर्य और देशभक्ति सिखाई, वहीं लेखन और अभिनय ने मुझे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर दिया। अब प्रोडक्शन हाउस के जरिए मैं सिर्फ अपने सपने नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के युवाओं के सपनों को भी उड़ान देना चाहता हूँ। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा और जिम्मेदारी भरा कदम है।
 प्रश्न 2: “भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” शुरू करने का विचार कैसे आया?
उत्तर: जब मैंने एक्टिंग शुरू की, तो महसूस हुआ कि हमारे क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्लेटफॉर्म की बहुत कमी है। इसी कमी को दूर करने के लिए मैंने “भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” की नींव रखी। मेरा उद्देश्य है कि लोकल टैलेंट को बड़े स्तर पर पहचान मिले और उन्हें बाहर भटकना न पड़े।
 प्रश्न 3: 1 मई 2026 को होने वाली ओपनिंग के बारे में कुछ खास बताइए।
उत्तर: यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। इस दिन हम अपने प्रोडक्शन हाउस की विजन और आने वाले प्रोजेक्ट्स की झलक भी पेश करेंगे। मेरा प्रयास है कि यह कार्यक्रम यादगार बने और इसमें क्षेत्र के कलाकारों, समाजसेवियों और खास मेहमानों की मौजूदगी रहे।
 प्रश्न 4: अभिनय की दुनिया में आपका सफर कैसे शुरू हुआ?
उत्तर: बचपन से ही मुझे स्टेज का शौक था। स्कूल और कॉलेज में छोटे-छोटे कार्यक्रमों से शुरुआत हुई। फौज में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा और यही शौक धीरे-धीरे जुनून बन गया।
 प्रश्न 5: फौज में 22 साल का अनुभव आपके इस नए सफर में कैसे मदद कर रहा है?
उत्तर: फौज ने मुझे हर परिस्थिति में मजबूत रहना सिखाया। अनुशासन, समय की पाबंदी और टीमवर्क—ये सभी गुण फिल्म इंडस्ट्री में भी उतने ही जरूरी हैं। आज मैं जो भी कर पा रहा हूँ, उसमें फौजी जीवन का बहुत बड़ा योगदान है।
 प्रश्न 6: आपकी फिटनेस और ऊर्जा का राज क्या है?
उत्तर: नियमित व्यायाम, संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच—यही मेरी फिटनेस का राज है। फौजी जीवनशैली आज भी मेरे साथ है।
 प्रश्न 7: परिवार का इस सफर में कितना सहयोग मिला?
उत्तर: परिवार का साथ न हो तो कोई भी सपना अधूरा रह जाता है। शुरुआत में थोड़ी चिंता थी, लेकिन आज मेरा परिवार मेरे हर फैसले में मेरे साथ खड़ा है। यही मेरा सबसे बड़ा हौसला है।
 प्रश्न 8: क्या आपको कभी फिल्मों में आने से रोका गया?
उत्तर: सीधे तौर पर नहीं, लेकिन एक डर जरूर था कि यह क्षेत्र अनिश्चित है। लेकिन जब लोगों ने मेरा जुनून देखा, तो धीरे-धीरे सभी ने समर्थन देना शुरू कर दिया।
 प्रश्न 9: गांव और फिल्म इंडस्ट्री—दोनों का अनुभव कैसा रहा?
उत्तर: गांव की सादगी और जमीनी सच्चाई मुझे हमेशा प्रेरित करती है, वहीं फिल्म इंडस्ट्री ने मुझे पेशेवर बनना सिखाया। मैं चाहता हूँ कि इन दोनों को मिलाकर कुछ नया और सच्चा कंटेंट तैयार करूं।
 प्रश्न 10: आगे “भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” के तहत क्या योजनाएं हैं?
उत्तर: हम क्षेत्रीय फिल्मों, शॉर्ट फिल्मों और सोशल मैसेज देने वाले प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। मेरा सपना है कि हमारे प्रोडक्शन हाउस से ऐसे कलाकार निकलें जो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएं।
 प्रश्न 11: अगर राजनीति में आने का मौका मिले तो क्या करेंगे?
उत्तर: मेरा पहला उद्देश्य समाज सेवा है। अगर कभी मौका मिला, तो मैं लोगों के लिए काम करना चाहूंगा, चाहे वह किसी भी माध्यम से हो।
 प्रश्न 12: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: अपने सपनों को छोटा मत समझिए। मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़िए—कामयाबी जरूर मिलेगी। और सबसे जरूरी, अपने क्षेत्र और अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए।
 प्रश्न 13: आपके अनुसार “प्यार” की परिभाषा क्या है?
उत्तर: प्यार सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और विश्वास का नाम है। जो आपको आगे बढ़ने की ताकत दे, वही सच्चा प्यार है।
 प्रश्न 14: क्या आपको अपने बचपन के दिन याद आते हैं?
उत्तर: बिल्कुल, बचपन की यादें ही इंसान को जमीन से जोड़े रखती हैं। आज भी उन दोस्तों और पलों को याद करता हूँ तो एक अलग ही खुशी मिलती है।
 संवाददाता सुरेंद्र मलानिया का कहना है
“आज के बदलते दौर में, जब युवा बड़े शहरों की ओर पलायन कर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते हैं, ऐसे समय में सुनील भड़ाना का यह कदम न केवल सराहनीय है, बल्कि एक नई सोच और दिशा का प्रतीक भी है। एक फौजी, जिसने देश की सेवा में अपने जीवन के बहुमूल्य 22 वर्ष समर्पित किए, वही व्यक्ति अब समाज और क्षेत्र के युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए एक मजबूत मंच तैयार कर रहा है—यह अपने आप में एक प्रेरणादायक कहानी है।
‘भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन’ केवल एक प्रोडक्शन हाउस नहीं, बल्कि यह उन तमाम प्रतिभाओं की उम्मीद है, जो संसाधनों और अवसरों के अभाव में अपनी कला को आगे नहीं ला पाते। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर बागपत-बड़ौत क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म के अभाव में कई सपने अधूरे रह जाते हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह पहल उन अधूरे सपनों को एक नई उड़ान देगी।
1 मई 2026 का दिन केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं होगा, बल्कि यह एक आंदोलन की शुरुआत होगी—एक ऐसा आंदोलन, जो स्थानीय कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाएगा और क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
मुझे यह भी विश्वास है कि सुनील भड़ाना अपने फौजी अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी के बल पर इस प्रोडक्शन हाउस को एक नई पहचान दिलाएंगे। आने वाले समय में ‘भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन’ न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग छाप छोड़ेगा।
अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि ऐसे प्रयासों को समाज का पूरा समर्थन मिलना चाहिए, क्योंकि यही प्रयास हमारे युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने का काम करते हैं।”
सुनील भड़ाना का यह सफर सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं।
“भड़ाना फिल्म प्रोडक्शन” का 1 मई 2026 को होने वाला शुभारंभ निश्चित रूप से क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक नई दिशा साबित हो सकता है।
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