गोड्डा

सत्संग एवं संस्कार का महत्व– स्वामी यादवेन्द्रानन्द जी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम चरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन का कार्यक्रम अत्यंत भव्य सत्संग समारोह के रूप में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में संस्थान के संस्थापक एवं संचालक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी यादवेन्द्रानन्द जी ने सत्संग एवं संस्कार का महत्व विषय पर अपने प्रेरणादायी विचार रखे।
नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो गोड्डा
स्वामी जी ने कहा कि—
मनुष्य के जीवन को उज्ज्वल, संस्कारित और आध्यात्मिक दिशा देने का सशक्त माध्यम सत्संग है।उन्होंने बताया कि आज भौतिक युग में जहाँ मानव के संस्कार दिन-प्रतिदिन क्षीण होते जा रहे हैं, वहीं सत्संग ही वह पावन मंच है जो मानव को आत्मबोध (ईश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन) कराता है और उसे ईश्वर की ओर अग्रसर करता है।स्वामी जी ने आगे कहा, सत्संग केवल कथा या प्रवचन नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति का माध्यम है। जब मनुष्य ब्रह्मज्ञानी गुरु के सान्निध्य में आता है, तब उसके भीतर सुप्त पड़ी दिव्यता जाग्रत हो उठती है। उन्होंने संस्कार को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि, संस्कारहीन समाज कभी स्थायी नहीं रह सकता। जैसे जड़ के बिना वृक्ष टिक नहीं सकता, वैसे ही संस्कार के बिना मानवता टिक नहीं सकती। सत्संग ही वह स्थान है जहाँ से श्रेष्ठ संस्कारों का संचार होता है।
*उन्होंने तुलसीदास जी की वाणी उद्धृत की —*
सत्संगति महि कृपा न होई। बिनु हरि कृप मिलहिं न संतोई॥
अर्थात्- बिना भगवान की कृपा के सत्संग नहीं मिलता, और बिना सत्संग के जीवन में सच्चा सुख नहीं मिलता। कार्यक्रम में साध्वी सुनीता भारती, साध्वी मंजू भारती, गायिका साध्वी सरिता भारती, गायक श्री गोपाल जी, तबला वादक श्री रामचंद्र जी, पेड वादक श्री चंदन जी की उपस्थिति रही।
साथ ही कार्यकर्ता श्री गोपाल कृष्ण, बासुदेव पंडित, सुभाष चंद्र दुबे, प्रो. मिथुनज्य दुबे, सुजीत दुबे, श्रीमती पिंकी देवी, सरिता दुबे, ज्योति कुमारी, रानी कुमारी एवं अन्य गणमान्य भक्त-श्रद्धालुओं के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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