
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
बरेली। संपत्ति कर वसूली में लगातार पिछड़ते प्रदर्शन से नगर निगम की साख पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शासन ने स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि यदि निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो नगर निगम को मिलने वाली 15वें वित्त आयोग, अवस्थापना निधि समेत विभिन्न योजनाओं की अनुदान राशि रोक दी जाएगी। इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ेगा। नगर निगम को इस वर्ष संपत्ति कर वसूली का लक्ष्य 160 करोड़ रुपए दिया गया है, जबकि वसूली अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे है। पिछले वर्ष 110 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले इस बार लक्ष्य बढ़ा, लेकिन रिकवरी की रफ्तार उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। स्थिति को संभालने के लिए निगम के टैक्स विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। बड़े करदाताओं की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। टीमों को उनके भवनों पर भेजकर तत्काल कर जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। बकाया जमा न करने पर कुर्की की कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है। टैक्स विभाग के अधिकारियों ने शहर के विभिन्न इलाकों में कैंप लगाकर भी कर वसूली बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन इन कैंपों का प्रभाव खास तौर पर दिखाई नहीं दे रहा है। कई क्षेत्रों में करदाता अब भी भुगतान को लेकर उदासीन बने हुए हैं, जिससे वसूली की गति बेहद धीमी बनी हुई है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी का कहना है कि बड़े बकायेदारों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। लक्ष्य हर हाल में पूरा करना अनिवार्य है, इसलिए टैक्स विभाग की टीमें मैदान में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बकायेदार समय से कर जमा नहीं करेंगे तो कुर्की की कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।


