बेतुल

बैतूल शहीद की पत्नी की चीत्कार ने भिगो दी आंखें, ‘लकीरें’ ने किया दर्शकों को विचलित

बैतूल के कलाकारों की प्रस्तुति ने समाज को दिखाया आईना

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। शहीद की पत्नी के दुःख और समाज की रूढ़ियों को मंच पर सजीव करने वाला नाटक लकीरें दर्शकों के दिल को छू गया। बैतूल के आरंभ थियेटर की इस प्रस्तुति ने हर आंख नम कर दी और सोचने पर मजबूर किया। नाटक में एक महिला का संघर्ष, उसका दर्द और साहस, हर दर्शक के दिल में उतर गया। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों जेएच कॉलेज के सभा हाल में स्वर्गीय नीरज पुरी स्मृति 10 दसवां सतपुडा नाट्य महोत्सव में निर्देशक सोनू कुशवाह, राइटर सोनू कुमार द्वारा लिखित नाटक लकीरें का मंचन किया गया था, जिसने समाज की कठोर सच्चाई को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। इस नाटक ने बताया कि लकीरें किस तरह जिंदगी में अलग-अलग रूप लेकर आती हैं। माथे पर खिंची लकीरें किस्मत तय करती हैं, जमीन पर खिंची लकीरें सरहद बन जाती हैं, शरीर पर खिंची लकीरें खून निकाल देती हैं और रिश्तों पर खिंची लकीरें अपनों को पराया कर देती हैं। इसी दर्दनाक सच्चाई को नाटक ने जीवंत किया।
नाटक में दिखाया गया कि कैसे एक महिला अपने पति की शहादत और बेटे की मृत्यु का दर्द एक ही दिन झेलती है। उसका पति देश की रक्षा करते हुए शहीद हो जाता है और सेना के जवान जब उसकी पार्थिव देह लेकर आते हैं, उसी समय महिला का नवजात बेटा भी दुनिया को अलविदा कह देता है। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि दर्शक खुद को रोने से नहीं रोक पाए। महिला, जो पहले समाज की बनाई रूढ़ियों और रिश्तों की ‘लकीरों’ में उलझी थी, अपने पति के शहीद होने के बाद उन सभी लकीरों को तोड़कर अपने बेटे और पति का साथ में अंतिम संस्कार करती है। यह दृश्य इतना भावुक था कि दर्शकों के दिलों को झकझोर कर रख दिया। नेतराम रावत नीरज रंग मंडल बैतूल  में हुए इस नाटक के कलाकारों ने ऐसा बेहतरीन अभिनय किया कि हर किसी की आंखें नम हो गईं। कलाकारों ने बड़ी संजीदगी से अपनी भूमिकाओं को निभाया। नाटक में मुख्य किरदारों में रतन का संघर्ष दिखाया गया, जो सरहद पर देश के लिए लड़ रहा होता है, वहीं उसकी पत्नी पूजा अपने घर में समाज की बनाई हुई बंदिशों और संघर्षों से जूझ रही होती है। जब वह समाज के नियमों के खिलाफ जाकर अपने पति और बेटे का अंतिम संस्कार खुद करने का निर्णय लेती है, तो यह दृश्य हर किसी के दिल को झकझोर देता है।
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