बेतुल

बैतूल खदानों में पसीने की लूट मजदूरों के शोषण का काला सच

अधिकारी–ठेकेदार गठजोड़ पर फूटा आक्रोश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल सारनी। कोयला खदानों में देश की ऊर्जा को सींचने वाले मजदूर आज खुद अंधेरे में धकेले जा रहे हैं। वर्षों से जारी आर्थिक, सामाजिक और मानवीय शोषण का कड़वा सच एक बार फिर सामने आया है। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदारों और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की आपसी मिलीभगत से उनके खून-पसीने की कमाई लूटी जा रही है। वेतन खातों में आधा डालकर शेष रकम वापस ले ली जाती है, जबकि न्यूनतम मजदूरी, समय पर भुगतान और घोषित बोनस सिर्फ कागजों की शोभा बनकर रह गए हैं।
यह केवल वेतन की कटौती नहीं, बल्कि संगठित शोषण की वह व्यवस्था है, जिसमें मजदूर की आवाज दबा दी जाती है। ईपीएफ की कटौती होती है, पर उसका कोई विवरण मजदूरों को नहीं दिया जाता। खदानों में सुरक्षा उपकरण, बीमा, चिकित्सा सुविधा और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं नदारद हैं। हर दिन जान जोखिम में डालकर काम करने वाला मजदूर खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है।
वरिष्ठ नेता संतोष देशमुख ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की चुप्पी ने शोषण को संरक्षण दिया है। कई बार आंदोलन और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना, पूरे सिस्टम पर संदेह पैदा करता है।
कांग्रेस नेता प्रदीप नागले ने बताया कि पाथाखेड़ा क्लब के पास WCL के श्रम अधिकारी की मौजूदगी से मजदूरों में उम्मीद जगी है। गुरुवार को करीब 150 मजदूरों ने काम बंद कर एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच, दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई और बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज होगा।
मजदूर संगठनों ने साफ कर दिया है—अब चुप्पी नहीं, न्याय चाहिए। अन्यथा इसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और प्रबंधन पर होगी।
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