मेरठ

कर्बला एक अतीत की घटना नहीं, यह हर युग की परीक्षा: मौलाना बाकरी

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

मेरठ। शनिवार को 2 मुहर्रम पर शहर के सभी इमामबाड़ों में इमाम हुसैन (अ.स.) के गम का सिलसिला जारी रहा। इमामबारगाह छोटी कर्बला में मोहर्रम के पहले अशरे को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी ने “उस्वा-ए-हुसैनी” शीर्षक के तहत सभा को किया।

संबोधित करते हुए मौलाना ने कहा, “इमाम हुसैन (अ.स.) का विद्रोह सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि हर युग के उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता का शाश्वत संदेश है। अगर मौजूदा दौर की यजीदी शासन के खिलाफ कोई हुसैनी नेतृत्व है, तो वह इमाम के विद्रोह का सिलसिला है। कर्बला हमें सिखाती है कि सच के लिए कम होना, झूठ के लिए ज़्यादा होने से बेहतर है। इमाम का विद्रोह हमें सिखाता है कि चुप रहना एक अपराध है। कर्बला एक अतीत की घटना नहीं है, यह हर युग की परीक्षा है जो बताती है कि हम यजीद के साथ हैं या हुसैन (अ.स.) के साथ।” मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन के चचेरे भाई मुस्लिम इब्न अकील की शहादत का वर्णन किया, जिन्हें इमाम हुसैन ने विद्रोह से पहले कूफा भेजा था। यजीद की सेना ने उन्हें निर्दयता के साथ शहीद कर दिया। मजलिस में सोज़ खवानी दारैन ज़ैदी ने अदा की। नमाज ज़ौहरैन के बाद अज़ा खाना शाह-ए-कर्बला वक्फ मंसबिया में मशहूर वक्ता मौलाना शब्बर हुसैन खां ने “फज़ल-ए- ईलाही और हिदायत की जिम्मेदारी” शीर्षक के आधार पर मजलिस को संबोधित किया।

मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन और उनके परिजनों के कर्बला पहुंचने का मंज़र बयान किया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और हज़रत फातिमा (अ.स.) को उनके लाल का पुरसा दिया। मजलिस में सोज़ ख्वानी फैसल अली ने की। शहर की अन्य इमामबारगाहों में निर्धारित समय पर मजलिस और मातम का सिलसिला जारी रहा। मगरिब की नमाज के बाद जाहिदियान स्थित इमामबारगाह मुसम्मात नायाब बेगम से जुलूस निकला, जो देर रात इमामबारगाह जाहिदियान पहुंचकर खत्म हुआ। शहर की तमाम मातमी अंजुमनों ने नौहा ख्वानी और मातम बरपा किया। मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत ज़किया ने बताया कि रविवार को भी मजलिस के बाद कोतवाली थाना स्थित इमामबारगाह जाहिदियान से जुलूस बरामद होगा।

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