ललितपुर
उर्वरक सब्सिडी नीति में सुधार की उठाई मांग
एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने उर्वरक सब्सिडी नीति में सुधार, यूरिया के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर देश के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन ने वर्तमान उर्वरक मूल्य संरचना में व्याप्त असंतुलन पर चिंता जताते हुए कहा है कि सस्ते यूरिया और महंगे एनपीके/डीएपी उर्वरकों के कारण किसान मजबूरी में यूरिया का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार वर्तमान में 45 किलोग्राम यूरिया की कीमत मात्र 266 है, जबकि एनबीएस नीति के चलते एनपीके ग्रेड उर्वरकों की कीमत 2100 प्रति 50 किलोग्राम तक पहुंच गई है। इस बड़े मूल्य अंतर के कारण मिट्टी अम्लीय हो रही है और सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं, जो दीर्घकाल में कृषि उत्पादन के लिए घातक है।
यूरिया गोल्ड मॉडल का प्रस्ताव
ज्ञापन में एक क्रांतिकारी समाधान सुझाते हुए सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) और जिंक युक्त यूरिया को बढ़ावा देने की मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, इन्हें 500 प्रति 40 किलोग्राम की दर से चरणबद्ध तरीके से बाजार में लाया जाए तथा वर्तमान नाइट्रोजन आधारित यूरिया का उत्पादन हर वर्ष 20 प्रतिशत घटाया जाए। साथ ही, यूरिया पर बचने वाली सब्सिडी को एनपीके और डीएपी उर्वरकों की ओर स्थानांतरित कर उनकी कीमत क्रमश: अधिकतम 1500 और 1350 प्रति 50 किलोग्राम तय करने की मांग की गई है, जिससे किसानों को संतुलित पोषण मिल सके और सरकारी बजट पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।
मृदा व पर्यावरण के लिए लाभकारी
एसोसिएशन ने बताया कि वैज्ञानिक शोधों के अनुसार सल्फर कोटेड यूरिया एक स्लो-रिलीज उर्वरक है, जिससे मिट्टी की खराबी में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आती है। इसकी उपयोग क्षमता 50 से 60 प्रतिशत तक होती है, जबकि सामान्य यूरिया की क्षमता मात्र 30 से 40 प्रतिशत रहती है। इसके अलावा, यह भूजल प्रदूषण को भी रोकने में सहायक है।
नीतिगत स्पष्टता की मांग
ज्ञापन में उर्वरक कंपनियों द्वारा एक ही ग्रेड के अलग-अलग मूल्य तय किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पुन: प्रत्येक ग्रेड की अधिकतम खुदरा कीमत तय करने और पोटाश की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करने की मांग की है, जिससे गन्ना जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित न हो। अंत में जिला अध्यक्ष महेश जैन मोनू ने प्रधानमंत्री से इस विषय पर प्रत्यक्ष भेंट कर जमीनी समस्याओं और समाधानों पर विस्तार से चर्चा करने का समय देने की अपील की है।