कानपुर

जीएसटी अपीलीय अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2025, जीएसटी 2.0 और हाल के संशोधनों पर सेमिनार सम्पन्न हुआ 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
कानपुर : गैंजेस क्लब में एसोशिएशन ऑफ जीएसटी ट्रिब्यूनल प्रैक्टिशनर्स द्वारा धर्मेन्द्र अकादमी ऑफ जीएसटी अवेयरनेस के सहयोग से आयोजित जीएसटी अपीलीय अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2025, जीएसटी 2.0 और हाल के संशोधनों पर सेमिनार सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रथम सत्र के वक्ता सीए ऋषभ मिश्रा ने कहा कि जीएसटी लागू होने के आठ वर्ष बाद पहली बार एक प्रभावी और सुगठित जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल (जी-एस-टी-ए-टी) का गठन हुआ है, जिसका उद्देश्य करदाताओं को एकरूपता, पारदर्शिता और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के लिए अपील की नई ई-फाइलिंग प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन होगी तथा किसी भी प्रकार के भौतिक (फिज़िकल) दस्तावेज़ स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपीलें 30 जून 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी, जबकि उसके बाद पारित आदेशों के विरुद्ध अपील तीन माह के भीतर दायर करनी होगी। उन्होंने आगे कहा कि ₹50,000 तक की अपील को ट्रिब्यूनल चाहें तो स्वीकार करने से मना कर सकता है तथा अपील स्वीकार होने से पूर्व विवादित कर का 10% जमा करना अनिवार्य होगा। ₹50 लाख तक के विवादों की सुनवाई एकल पीठ (सिंगल बेंच) तथा इससे अधिक के विवादों की सुनवाई युगल पीठ (डिवीजन बेंच) द्वारा की जाएगी। सभी दस्तावेज़ अंग्रेज़ी भाषा में संलग्न करना आवश्यक है। सीए ऋषभ मिश्रा ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि जी-एस-टी-ए-टी पोर्टल नया है, इसलिए शुरुआती दौर में तकनीकी कठिनाइयाँ हो सकती हैं, जैसे आदेश अपलोड न होना, प्राप्ति में विलम्ब (ऐक्नॉलेजमेंट डिले) इत्यादि। अतः करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे समय से अपील फाइल करें। द्वितीय सत्र में वक्ता सीए कुमार सौरव ने जीएसटी 2.0 और हाल के संशोधनों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 भारतीय कर प्रणाली को अत्यधिक डिजिटल, स्वचालित (ऑटोमेटेड) और पारदर्शी बनाने का व्यापक प्रयास है, जिसमें रिटर्न दाखिल (फाइलिंग) को सरल करने,जांच (स्क्रूटिनी) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित (ए.आई. इनेबल्ड) बनाने और विभागीय कार्यवाही को त्वरित एवं जोखिम-आधारित (रिस्क बेस्ड) बनाने के प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई-टी-सी) का दावा अब केवल जी.एस.टी.आर.–2बी के आधार पर किया जा सकेगा, और आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) द्वारा कर जमा न करने पर प्राप्तकर्ता (रीसिपिएंट) का आई-टी-सी भी अवरुद्ध किया जा सकता है। ई-इन्वॉयसिंग की सीमा ₹10 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है तथा कई सेवाओं पर कर दरों का युक्तिसंगतीकरण (रेट रेशनलाइजेशन) किया गया है। सीए कुमार सौरव ने आगे कहा कि विभागीय जांच (डिपार्टमेंटल स्क्रूटिनी) अब पूर्णत जोखिम-आधारित (रिस्क-बेस्ड) होगी और नोटिसें कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित (ए.आई.-ड्रिवन) होंगी। उन्होंने बताया कि जीएसटी 2.0 में रिफंड प्रक्रिया भी स्वचालित (ऑटोमेटेड) हो रही है, जिससे करदाताओं को 7–15 दिनों में रिफंड उपलब्ध कराया जा सकेगा। वर्तमान में चल रही आई-टी-सी सुधार (रीफॉर्म्स), दण्डात्मक प्रावधान (पेनल्टी प्रोविज़न्स), फर्जी आई-टी-सी पर कार्यवाही (फेक आई-टी-सी क्रैकडाउन), ऑनलाइन सुनवाई प्रणाली, लेखा-परीक्षा सरलीकरण (ऑडिट सिंप्लीफिकेशन), क्यू-आर-एम-पी संशोधन तथा अनुपालन संरचना (कॉम्प्लायंस स्ट्रक्चर) को उन्होंने विस्तार से समझाया और कहा कि आने वाले समय में जीएसटी व्यवस्था अधिक स्थिर,सुगम और तकनीक-संचालित होगी।
दोनों तकनीकी सत्रों के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने जी-एस-टी-ए-टी पोर्टल, अपील प्रक्रिया,समय-सीमा (लिमिटेशन),आई-टी-सी पात्रता (एलिजिबिलिटी),ई-इन्वॉयसिंग नियम और जांच नोटिसों से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न पूछे,जिनका समाधान वक्ताओं ने विस्तार से प्रस्तुत किया। इसके पश्चात कानपुर के परीक्षा में सफल नए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता (एडवोकेट) संतोष गुप्ता ने की। संचालन सीए ऋतुप्रिया चौधरी एवं धन्यवाद ज्ञापन सीए संजय नाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संकल्प भल्ला, प्रखर गुप्ता,मोहम्मद सोहेल, छवि जैन,पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव,अरुण अहलुवालिया,दीप कुमार मिश्र एवं राजेंद्र कृष्ण शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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