अलवर

विश्व पर्यावरण दिवस पर वर्चुअल संगोष्ठी आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

वृक्षारोपणोपरांत ज्यादा महत्वपूर्ण है पौधों की सुरक्षा करना–श्याम साहित्य दर्पण काव्य मं

जैविक और अजैविक दोनों घटकों का संरक्षण जरूरी

अलवर, राजस्थान / सोनभद्र, उत्तर प्रदेश। सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्याम साहित्य दर्पण काव्य मंच(पंजीकृत) के बैनर तले पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का विधिवत् शुभारंभ संस्था की राष्ट्रीय संरक्षिका व वरिष्ठ कवयित्री डॉ. संगीता पाल ने अपनी सुमधुर वाणी वंदना से किया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तराखंड की पावन भूमि से शिरकत कर रहीं विजय लक्ष्मी गुसाईं ने पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पौधे लगाना ही बहादुरी का कार्य नहीं, बल्कि उस लगाए गए मासूम पौधे को हम किस तरह सुरक्षित बचा पाते हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। 

         कार्यक्रम की अगली कड़ी में हिंदी साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर व विशिष्ट अतिथि डॉ. रवि घायल, कृष्ण कुमार मौर्य सरल, परम् पूज्य दीदी मां सुनीता, देवी लाल बैरवा, प्रो. सुषमा देवी, डॉ. भारती गुप्ता, सीमा अग्रवाल, सविता रतूड़ी, प्रतिमा पाठक, नेहा कुमारी, कविता चौधरी, रश्मि पैन्यूली, सीमा कालरा, राम जतन पाल, अनुपम शुक्ला, रमेश चंद्रा, प्रो. आशा पंकज मूंदड़ा ने सभी सम्मानित साहित्य अनुरागियों को गंगा दशहरा और विश्व पर्यावरण दिवस की शुभ कामनाएं प्रेषित करते हुए अपने गीत, ग़ज़ल, कविता और वक्तव्यों के माध्यम से पर्यावरण के सुरक्षा और संरक्षा पर प्रकाश डाला।

         इस पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन कर रहे संस्था के राष्ट्रीय सचिव और यूथ आइकॉन कविवर अवध बिहारी अवध, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विपुल कुमार भवालिया और अध्यक्ष श्याम बिहारी मधुर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस ब्रह्मांड में जैविक और अजैविक दोनों घटकों का संरक्षण बहुत जरूरी है। इसमें ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम अपने घर के प्रत्येक परिवार के जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और दो से तीन साल तक उसकी उचित देखभाल यथा निराई–गुराई, पोषक तत्व और जल की समुचित व्यवस्था करें तभी पौधे लगाना सार्थक होगा। एक पौधे की खासियत है कि वह फल अवश्य देगा। यदि फल नहीं तो छाया व लकड़ी अवश्य देगा। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षता कर रहे डॉ. विपुल कुमार भवालिया के अध्यक्षीय संबोधन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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