एमडीए की मनमानी के चलते आत्महत्या को मजबूर किसान मनोहर के मामले में कमिश्नर से मिले आप नेता

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की अवहेलना कर एमडीए द्वारा जमीन की नीलामी के चलते आत्महत्या के लिए मजबूर हुए किसान मनोहर के मामले की समयबद्ध मजिस्ट्रियल जांच व परिवार को न्याय की मांग को लेकर आप नेता आज मंडलायुक्त से मिले और ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने कहा मेरठ विकास प्राधिकरण की साजिश और मनमानी ने मनोहर को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की अवहेलना कर उनकी जमीन छीनने की कोशिश ने एक गरीब किसान का जीवन खत्म कर दिया। मेरठ के किसान मनोहर और उनके परिवार के आठ लोगों की पुश्तैनी जमीन (लगभग 9 बीघा) 35 वर्षों से अधिग्रहण के चक्कर में फँसी थी। इस जमीन से वे अपनी 80 वर्षीय माँ, पत्नी, और तीन मासूम बेटियों का भरण-पोषण करते थे। प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर और तमाम नियम कायदे कानून को धता बताते हुए जबरन जमीन की नीलामी की रसूखदारों ने इसका फायदा उठाया और वहाँ पर फाइव-स्टार अस्पताल बनाने की साजिश रची बार-बार किसान की फसलें नष्ट कीं। दबाव से टूटकर मनोहर ने आत्महत्या कर ली, जिससे उनका परिवार कर्ज और भुखमरी में डूब गया। इसलिए मनोहर की आत्महत्या की साजिश, और हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की अवहेलना की गहन मजिस्ट्रियल जांच हो। तत्काल मृतक किसान मनोहर के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए। मनोहर की तीन मासूम बेटियों की पूरी शिक्षा निःशुल्क सुनिश्चित हो। एमडीए ने स्टे ऑर्डर के बावजूद मनोहर की जमीन 45,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर नीलाम की, जबकि बाजार मूल्य 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इस साजिश में शामिल प्राधिकरण के अधिकारियों और नीलामी में ओने-पौने दामों में जमीन हासिल करने वाले लोगों की जाँच हो। इस घटना की मजिस्ट्रियल जांच हो ताकि मृतक किसान मनोहर के परिवार को न्याय मिले और ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। आज प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश प्रवक्ता/ जिला अध्यक्ष अंकुश चौधरी के साथ जिला संरक्षक एसके शर्मा, जिला महासचिव जीएस राजवंशी, किसान प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष फुरकान त्यागी, जिला सचिव सचिन वाल्मीकि, जिला सचिव वैभव मलिक आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।


