सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर अधिवक्ताओं में आक्रोश
बागपत न्यायालय परिसर में हुई विरोध बैठक, सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने के निर्णय ने अधिवक्ता समुदाय में रोष की लहर दौड़ा दी है। बुधवार को बागपत न्यायालय परिसर में वरिष्ठ अधिवक्ता राशिद तसलीम के चैंबर पर एक विरोध बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट सोमेन्द्र ढाका ने की, जबकि संचालन एडवोकेट समोद पंवार ने किया।
बैठक में वक्ताओं ने सरकार के इस निर्णय को गरीबों, मजदूरों और वंचित तबके के बच्चों के भविष्य पर सीधा प्रहार बताया। वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट महेश रंगा ने तीखे शब्दों में कहा, “सरकार शराब के ठेकों की संख्या में तो बेहिसाब बढ़ोतरी कर रही है, लेकिन सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। यह निर्णय सामाजिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ है।”
एडवोकेट फिरोज ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा का निजीकरण कर रही है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की पहुंच कठिन होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यह संविधान में निहित समान शिक्षा के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
एडवोकेट हर्ष वशिष्ठ और एडवोकेट तेजपाल भाटी ने संयुक्त रूप से कहा, “मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। सरकार को यह जनविरोधी और शिक्षा विरोधी फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो अधिवक्ता समुदाय सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।”
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने जल्द ही यह आदेश वापस नहीं लिया, तो अधिवक्ता समुदाय चरणबद्ध आंदोलन की राह अपनाएगा।
इस विरोध बैठक में एडवोकेट आरिफ, सुरजीत, अजित, अजय वर्मा, गिरीश, नेतृपाल समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे बच्चों के शिक्षा अधिकार की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष को तैयार हैं।



