अमरोहा
जिंदगी पर भारी डग्गामार संचालकों की मनमानी

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
अमरोहा। जनपद में अनफिट वाहन ही नहीं डग्गामार वाहन संचालकों की मनमानी भी हादसों का कारण बन रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार गंभीर नहीं है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। अगर डग्गामारी को परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के जिम्मेदार गंभीरता से लें तो हादसों पर लगाम लग सकती है।
इसी तरह के डग्गामार वाहन स्कूलों में भी लगे हैं जो गलत तरीके से स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने का काम कर रहे हैं। यह वाहन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में भी नहीं है, इसलिए जिम्मेदार इनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं करते। अगर जाने अनजाने में ऐसे वाहनों को पकड़ भी लिया जाता है तो सांठगांठ करके छोड़ दिया जाता है।
ग्रामीण इलाकों के ज्यादातर स्कूलों में ऐसे ही खटारा और डग्गामार वाहन लगे हैं। बच्चों को स्कूल छोड़ने और छुट्टी के बाद यही वाहन सवारियां ढोते हैं। इतना ही नहीं जिले से दिल्ली के लिए बड़ी संख्या में डग्गामार बसों का संचालन हो रहा है लेकिन जिम्मेदार इन बसों पर कोई कार्रवाई नहीं करते। दो साल पहले सावन के महीने में पाबंदी के बाद भी हाईवे पर आई डग्गामार बस के कारण ही दो कांवड़ियों की मौत हुई थी।
हाईवे समेत जिले की मुख्य सड़कों पर डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। इन वाहनों पर यात्री लटक कर सफर करते हैं। इससे हादसों का अंदेशा बढ़ रहा है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की अनदेखी इन डग्गामार वाहन संचालकों का हौसला बढ़ा रही है। एक तरफ चालक मनचाहे स्थानों पर वाहनों को खड़ा करके यात्रियों को बैठा कर डग्गामारी कर रहे हैं। यह वाहन थाना और पुलिस चौकी के सामने से भी दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। जोया व गजरौला में बड़ी संख्या में ईको वैन व टेंपो चालक यात्रियों को आवाज देकर बैठाते है। कुछ ही दूरी पर यातायात पुलिस कर्मी भी ड्यूटी करते हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करना तो दूर टोकने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
टूरिस्ट बसों की डग्गामारी आम यात्रियों की जिंदगी पर भारी
टूरिस्ट बसों की डग्गामारी आम यात्रियों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से यह बसें बिना मानक व बिना सुरक्षा इंतजामों के साथ सड़कों पर फर्राटा भर रही है जो आए दिन हादसों का कारण बन रही है। जिले से भी दर्जनों बसें यात्रियों को दिल्ली ला और ले जा रही है। इनमें किसी भी बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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दो महीने में 222 डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई की गई है जबकि तीन महीने में 5980 चालान भी किए गए हैं। आगे भी कार्रवाई की जाएगी। -महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन



