रेल सुविधाओं की मांग को लेकर पाकुड़- साहिबगंज में आन्दोलन तेज, पत्थर लोडिंग ठप, झामुमो का खुला समर्थन
Movement intensifies in Pakur-Sahibganj demanding rail facilities, stone loading halted, JMM openly supports

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में रेलवे से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पत्थर व्यवसायियों का आन्दोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 16 जनवरी से पत्थर लोडिंग का कार्य पूरी तरह ठप है, जिसके चलते पाकुड़ जिले की तीनों प्रमुख पत्थर लोडिंग साइडिंग वीरान पड़ी हैं। आन्दोलन का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। आन्दोलन के समर्थन में पाकुड़ पहुंचे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केन्द्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने कहा कि पार्टी पत्थर व्यवसायियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आन्दोलन अब निर्णायक मोड़ पर है और मांगें पूरी होने तक इसे वापस नहीं लिया जायेगा। पंकज मिश्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रेलवे प्रशासन ने शीघ्र कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो 24 जनवरी से अमरापाड़ा से कोयले की ढुलाई भी बंद कर दी जायेगी। पंकज मिश्रा ने बताया कि आन्दोलन की प्रमुख मांगों में कोविड काल के दौरान बंद की गई ट्रेनों का पुनः संचालन, इस मार्ग से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का पाकुड़ और साहिबगंज रेलवे स्टेशनों पर ठहराव, पटना और दिल्ली के लिए सीधी रेल सेवा की शुरुआत तथा यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं में सुधार शामिल है। उन्होंने कहा कि अब तक रेलवे प्रशासन या केन्द्र सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इस दौरान लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने भी आन्दोलन को समर्थन देते हुए कहा कि पाकुड़ और साहिबगंज जैसे पिछड़े जिलों की रेलवे द्वारा लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल (कोविड काल) में बंद की गई ट्रेनों का अब तक शुरू नहीं होना, जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक झामुमो जनहित के इस आन्दोलन के साथ खड़ी रहेगी। वहीं महेशपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गये विधायक प्रो. स्टीफन स्टीफन मरांडी ने कहा कि रेलवे सुविधाओं की कमी का सीधा असर क्षेत्र के व्यवसाय, रोजगार और आम यात्रियों पर पड़ रहा है। उन्होंने पत्थर व्यवसायियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि यदि केन्द्र सरकार और रेलवे ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आन्दोलन को और व्यापक रूप दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकुड़ और साहिबगंज को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना अब विकल्प नहीं, बल्कि क्षेत्र की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।
गौरतलब है कि पाकुड़ रेलखंड से हर वर्ष लगभग 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व रेलवे को प्राप्त होता है, इसके बावजूद यहां के यात्रियों को अब तक सुगम और व्यवस्थित रेल कनेक्टिविटी नहीं मिल पाई है। यह स्थिति क्षेत्र के समग्र विकास में बड़ी बाधा के रूप में उभर रही है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि केन्द्र सरकार और रेलवे प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए शीघ्र ठोस और प्रभावी कदम उठाएं।



