सिंगरौली
17 साल बाद भी पुनर्वास अधूरा महान एल्युमिनियम प्लांट से विस्थापितों को उठा सवाल जमकर हुआ प्रदर्शन।
7 दिन का भू-विस्थापितों का अंतिम अल्टीमेटम फिर उग्र आंदोलन की चेतावनी।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली : बरगवां तहसील स्थित महान हिंडालको अल्युमिनियम प्लांट बरगवां वर्ष 2007 में भू-अर्जन के बाद घर, जमीन और आजीविका गंवाने वाले विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास की बाट जोह रहे हैं। क्या 17 साल बाद भी उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल पाया यही सवाल अब जिला प्रशासन पर खड़ा हो रहा है महान एल्युमिनियम पावर प्लांट हिंडालको से प्रभावित परिवारों ने जिला कलेक्टर एवं जिला पुनर्वास अधिकारी के नाम तहसीलदार एवं कंपनी के अधिकारियों के समक्ष ज्ञापन सौंपते हुए पुनर्वास सुविधाएं दिलाने की मांग की है। विस्थापितों का कहना है कि वर्ष 2007 में उनका भूमि अधिग्रहण हुआ था और 18 दिसंबर 2007 को भू-अर्जन अधिनियम 1894 की धारा 41 के तहत करार भी किया गया था। क्या विस्थापितों को दरकिनार कर बाहरी लोगों को नौकरी दी गई विस्थापितों का आरोप है कि उन्होंने तकनीकी एवं गैर-तकनीकी योग्यता प्राप्त की, फिर भी कंपनी में रोजगार के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। जबकि कथित तौर पर बाहरी लोगों को प्राथमिकता देकर कंपनी में नियुक्तियां की जा रही हैं। क्या यह पुनर्वास नीति का उल्लंघन नहीं है। परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें मध्यप्रदेश शासन की आदर्श पुनर्वास नीति 2002 के तहत लाभ मिलना चाहिए था। प्रत्येक विस्थापित को पहचान पत्र भी जारी किए गए थे। नीति के अनुसार परियोजना में योग्यता के आधार पर प्राथमिकता से रोजगार दिया जाना था।प्रशासन को अधिकृत किया गया था, फिर भी लाभ क्यों नहीं विस्थापितों के अनुसार उस समय कलेक्टर सिंगरौली को पुनर्वास के अतिरिक्त लाभ देने के लिए अधिकृत किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि प्रशासन के पास अधिकार थे, तो 17 वर्षों में ठोस कार्यवाही क्यों नहीं हुई मुख्य मांगें सभी भू-विस्थापित परिचय पत्रधारकों की विधिवत जांच एकमुश्त पुनर्वास लाभ का वितरण परियोजना में योग्यता अनुसार प्राथमिकता से रोजगार नीति के अनुरूप अन्य सुविधाओं का तत्काल क्रियान्वयन अब देखना यह है कि जिला कलेक्टर कार्यालय सिंगरौली इस मामले में क्या रुख अपनाते है और क्या वर्षों से लंबित पुनर्वास का सपना पूरा हो पाएगा। क्या 17 साल बाद भी विस्थापितों को न्याय मिलेगा क्या पुनर्वास नीति सिर्फ कागजों तक सीमित है इन सवालों का जवाब प्रशासनिक कार्यवाही ही तय करेगी। #7_दिन की चेतावनी विस्थापितों का फिर उग्र आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम* महान एल्युमिनिय प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। क्या 17 वर्षों से लंबित पुनर्वास और रोजगार की मांगों पर अब भी निर्णय नहीं होगा विस्थापितों ने कलेक्टर एवं जिला पुनर्वास अधिकारी के समक्ष निस्सूत्रीय ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर 07 दिवस के भीतर कार्यवाही की जाए। अन्यथा निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद परियोजना प्रबंधन के विरुद्ध अनिश्चितकालीन उग्र आंदोलन किया जाएगा। विस्थापितों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो वे हिंडालको कंपनी एवं प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन छेड़ेंगे।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान यदि किसी प्रकार की हानि या अव्यवस्था होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन एवं कंपनी प्रबंधन की होगी। प्रशासन के सामने बड़ा सवाल ज्ञापन के बाद अब निगाहें जिला कलेक्टर कार्यालय सिंगरौली पर टिक गई हैं। क्या 7 दिन के भीतर विस्थापितों की मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा क्या प्रशासन मध्यस्थता कर समाधान निकालेगा या फिर औद्योगिक क्षेत्र में उग्र आंदोलन की स्थिति बनेगी विस्थापितों का संदेश साफ पुनर्वास और रोजगार का अधिकार सुनिश्चित किया जाए लंबित मांगों पर तत्काल आदेश जारी हों परियोजना में प्राथमिकता से रोजगार दिया जाए अब देखना यह है कि क्या 7 दिन में समाधान निकलता है या सिंगरौली में एक और बड़ा औद्योगिक आंदोलन देखने को मिलेगा।




