यूरिया की कालाबाजारी पर प्रशासन की सख्ती
जनपद में डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध: डीएम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
हापुड़ : जनपद के जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने मंगलवार को कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार को संबोधित करते हुए बताया कि हापुड़ जिले में डीएपी और यूरिया का पूरे एक माह का स्टॉक उपलब्ध है। शासन स्तर पर निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, जिसके तहत यूरिया की आपूर्ति लगातार जारी है। जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है और किसानों को निर्धारित नियमों के अनुरूप ही इसका वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को एकमुश्त बड़ी मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं कराया जाता, ताकि वितरण प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायोचित बनी रहे।
बड़े सिंडिकेटों पर प्रशासन की कार्रवाई का सिलसिला जारी
डीएम ने यूरिया की कालाबाजारी में संलिप्त बड़े सिंडिकेटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन अवैध गतिविधियों में लिप्त सिंडिकेटों के विरुद्ध औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। साथ ही, नकली कीटनाशकों के विक्रय के आरोप में सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा इन बड़े सिंडिकेटों के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा और कोई भी ढील नहीं बरती जाएगी।
भ्रामक इंटरव्यू का किया खंडन
जिलाधिकारी ने आगे कहा कि सहकारी समितियों में यूरिया की उपलब्धता को पूरी तरह सुनिश्चित किया जा रहा है और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। उन्होंने एक समाचार पोर्टल द्वारा प्रकाशित एक विवादास्पद इंटरव्यू का कड़ा खंडन किया, जिसमें एक आपराधिक तत्व को स्थान दिया गया था। इस व्यक्ति के खिलाफ हाल ही में यूरिया के अनियमित वितरण (डायवर्जन) का मामला सामने आया है, जबकि नकली पेस्टिसाइड बेचने के आरोप में भी उसके विरुद्ध वाद दर्ज हो चुका है। इस व्यक्ति द्वारा बुलंदशहर, बागपत समेत अन्य जनपदों में यूरिया का अवैध विक्रय किया गया था। विभाग ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है, लेकिन इसके बावजूद अनुचित और भ्रामक बयानबाजी की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों में भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। डीएम ने यूरिया की कालाबाजारी के विरुद्ध चल रहे अभियान को और मजबूत करने का संकल्प जताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों के हक का एक दाना भी किसी उद्योग या सिंडिकेट को नहीं सौ जाएगा। साथ ही, उक्त समाचार पोर्टल द्वारा प्रसारित खबर का भी पूर्णतः खंडन किया। अंत में, किसानों से अपील की कि यदि वे किसी ब्रांडेड या महंगे पेस्टिसाइड या इंसेक्टिसाइड की खरीद के बाद भी अपनी फसल में अपेक्षित परिणाम न पाएं और उन्हें नकली दवा का संदेह हो, तो वे तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। इससे नकली उत्पादों की बिक्री पर अंकुश लगाया जा सकेगा।



