मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में डिज़ाइन थिंकिंग पर एफडीपी सफलतापूर्वक संपन्न

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा आईसीटी एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) “डिज़ाइन थिंकिंग” का बुधवार को सफल समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं प्रतिभागियों में नवाचार-आधारित सोच, समस्या समाधान की आधुनिक पद्धतियाँ तथा उपयोगकर्ता-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करना था।
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को डिज़ाइन थिंकिंग के पाँच प्रमुख चरण—एम्पैथाइज़, डिफाइन, आइडिएट, प्रोटोटाइप और टेस्ट—पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक एवं तकनीक-प्रधान युग में डिजाइन थिंकिंग न केवल उत्पाद विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावशाली और नवाचारी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एफडीपी के उद्घाटन सत्र में एमआईटी मेरठ के वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल, निदेशक प्रो. (डॉ.) के. एल. ए. खान, प्रिंसिपल (सीसीएस) डॉ. हिमांशु शर्मा, प्रिंसिपल (फार्मेसी) डॉ. नीरज कांत शर्मा, डीन एकेडमिक डॉ. गौरव शर्मा एवं एफडीपी समन्वयक आयुष सिंघल उपस्थित रहे।
आईसीटी एकेडमी के प्रतिनिधि सत्येन्द्र नारायण ने उद्योग जगत और शिक्षा क्षेत्र के बदलते रुझानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डिज़ाइन थिंकिंग के अपनाने से शिक्षकों में न केवल नवाचार बढ़ता है, बल्कि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है।
एफडीपी में एमआईटी के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों के साथ-साथ बाहरी संस्थानों से आए प्रतिभागियों सहित कुल 35–40 फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान समूह गतिविधियों, केस स्टडी, समस्या-आधारित लर्निंग, विचार-मंथन सत्र, तथा प्रोटोटाइप विकास पर आधारित कई इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने बेहतरीन उत्साह और सक्रियता दिखाई। निदेशक प्रो. (डॉ.) के. एल. ए. खान ने एफडीपी समन्वयक आयुष सिंघल के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कार्यक्रम की सूक्ष्म योजना, उत्कृष्ट प्रबंधन और सफल आयोजन एमआईटी की नवाचार-उन्मुख शैक्षणिक संस्कृति को दर्शाता है।
एफडीपी के समापन सत्र में वक्ताओं ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नए विचार विकसित करने, रचनात्मक समाधान खोजने और छात्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप मार्गदर्शन देने के लिए प्रेरित करते हैं। डिज़ाइन थिंकिंग शिक्षण संस्थानों में शोध अभिविन्यास, समस्या समाधान क्षमता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है।


