गाजियाबाद

लोनी के पचायरा गांव में करीब एक दर्जन मोरों की संदिग्ध मौत

इलाके में हड़कंप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी। थाना ट्रोनिका सिटी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पचायरा में राष्ट्रीय पक्षी मोरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। एक साथ करीब एक दर्जन मोरों के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मोरों को साजिश के तहत जहर देकर मारा गया है। उनका कहना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मोरों की मौत सामान्य घटना नहीं हो सकती। ग्रामीणों ने मृत मोरों का विधिवत पोस्टमार्टम कराए जाने, नमूनों की वैज्ञानिक जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय पक्षी की हत्या किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
प्रशासन ने शुरू की जांच प्रक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम और प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का कारण बीमारी, जहरीला आहार, पर्यावरणीय प्रदूषण या कोई अन्य वजह है।
वन विभाग की टीम ने किया मौके का निरीक्षण
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक साथ कई पक्षियों की मृत्यु के पीछे संक्रामक रोग, विषाक्त दाना-पानी या आसपास के खेतों में प्रयुक्त रसायन भी कारण हो सकते हैं। मृत मोरों के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं और आसपास के जल स्रोतों तथा कृषि क्षेत्रों की भी जांच की जाएगी।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा पर उठे सवाल
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित श्रेणी में आता है। ऐसे में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत न केवल कानूनी बल्कि नैतिक दृष्टि से भी अत्यंत गंभीर मामला है। यदि जहर देकर हत्या की पुष्टि होती है, तो यह वन्यजीव संरक्षण कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
पचायरा में मोरों की सामूहिक मौत ने पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह घटना प्राकृतिक कारणों का परिणाम है या किसी साजिश का हिस्सा ।
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