बहराइच
शुभ मुहूर्त में मनाएं धनतेरस दीपावली भाईदूज-आचार्य उत्सव शुक्ल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
दीपावली धनतेरस से लेकर यम द्वितीया तक 5 दिन का त्यौहार हैं। धन त्रयोदशी(धनतेरस)का प्रसिद्ध पर्व प्रदोषकाल में त्रयोदशी मिलने के कारण 18 अक्टूबर शनिवार को मनाया जाएगा एवं आज ही धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाएगी।धन,ऐश्वर्य में वृद्धि की कामना से विधिवत महालक्ष्मी का पूजन-अर्चन किया जायेगा। इसके लिए सर्वोत्तम प्रदोष काल में स्थिर ग्न 6 बजकर 59 बजे से 8 बजकर 56 बजे के मध्य प्राप्त हो रही हैं इसलिए पूजन-अर्चन का यह शुभ मुहूर्त हैं। 19 अक्टूबर रविवार को छोटी दीपावली(नरक चतुर्दशी),मास शिवरात्रि व्रत एवं हनुमान जयंती सायं मेष लग्न में श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। दूसरे दिन सूर्योदय से पूर्व ही हनुमान जी का दर्शन-पूजन कर लेना चाहिए।आचार्य उत्सव शुक्ल भरद्वाज के अनुसार 20 अक्टूबर सोमवार को मध्यान्ह 02 बजकर 32 मिनट से अमावस्या तिथि लग जायेगी जो अगले दिन 21 अक्टूबर मंगलवार को शाम 4 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। प्रदोषकाल एवं रात्रि में अमावस्या तिथि होने पर दीपावली मनाने का शास्त्रोक्त विधान है।चूंकि प्रदोष एवं रात्रि व्यापिनी अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर सोमवार को ही हैं इस लिए 20 अक्टूबर सोमवार को ही सनातन धर्म का विश्व प्रसिद्ध पर्व दीपावली हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की प्रभु श्रीगणेश के साथ पूजा होती हैं। मां लक्ष्मी धन समृद्धि की देवी हैं एवं प्रभु श्रीगणेश जी बुद्धि एवं विवेक के देवता हैं। यदि हम अपने जीवन में सदबुद्धि बनाएं रखें एवं परोपकार एवं कर्तव्य पालन का ध्यान रखें तो मां लक्ष्मी जी की कृपा से उत्तरोत्तर धन समृद्धि तो बढ़ती ही हैं।साथ ही साथ घर में खुशहाली भी आती हैं। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी एवं प्रभु श्रीगणेश जी की पूजा स्थिर लग्न में करना चाहिए।जिससे धन-धान्य की स्थिरता बनी रहती हैं।दीपावली पूजन के लिए तीन मुहूर्त निर्धारित किए जा रहे हैं:- १-दिन में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए स्थिर कुंभ लग्न 2 बजकर 13 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक।
२-सर्वोत्तम प्रदोष काल में स्थिर वृष लग्न 6 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 48 मिनट तक एवं ३- महानिशा में तांत्रिक पूजा मंत्र सिद्धि के लिए स्थिर सिंह लग्न 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक शेष रात्रि(भोर)में सूप बजाकर दरिद्र का निस्सारण एवं लक्ष्मी का पदार्पण कराया जाएगा स्नान-दान एवं श्राद्ध के लिए अमावस्या 21 अक्टूबर मंगलवार को *भौमवती अमावस्या* के पवित्र संयोग के साथ मनाई जाएगी। अन्नकूट का प्रसिद्ध पर्व देव मन्दिरों में विविध प्रकार के व्यंजनों के नैवेद्यार्पण(भोग)के साथ सम्पन्न होगा तथा काशी से अन्यत्र गोवर्धन पूजा भी 22 अक्टूबर बुधवार को सम्पन्न होगी।काशी में गोवर्धन पूजा सहित भ्रातृ द्वितीया(भइयादूज) चित्रगुप्त पूजा,कलम दवात पूजा 23 अक्टूबर गुरुवार को मनाई जाएगी। आज के दिन भाइयों को अपने बहनों के घर जाकर भोजन करना चाहिए तथा वस्त्र द्रव्यादि का उपहार देकर उनको सम्मान देना चाहिए इससे भाइयों के आयुष्य में वृद्धि होती हैं।



