खैरथल

जिला बचाओ संघर्ष समिति ने धरना स्थल पर की श्रृद्धाजलीं सभा कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी को दी श्रद्धांजलि

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा धरना शनिवार को 57वें दिन भी जारी हैं। इस मौके पर खैरथल अनाज मंडी में विशाल जनसभा का आयोजन होना था, जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का जुटना प्रस्तावित था। शुक्रवार देर रात पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के निधन से जनसभा को रद्द कर दिया गया है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी का शुक्रवार रात बीकानेर में निधन हो गया। वे पिछले दो साल से कोमा में थे और लंबे समय से उपचाररत थे। उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस ने प्रदेशभर के सभी कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। इस कारण खैरथल में प्रस्तावित जनसभा टल गई।

जिला बचाओं संघर्ष समिति ने धरना स्थल पर श्रद्धांजलि सभा की जिसमे विधायक दीपचंद खैरिया, विधायक ललित यादव ,रोहितास चौधरी ,वीर सिंह धानका समाज, तेजराम सैनी,सैनी समाज,मनशा खान,भारत यात्री विजेंद्र महलावत, विनोद कुमारी सांगवान,अजीत यादव, मजदूर नेता धीरूभाई, हल्लू खां, गफ्फा़र खां,ईस्माइल खां,पंकज रोघा,सर्वेश गुप्ता, विक्की चौधरी, कृष्ण इंजीनियर, बीपी सुमन,बाबूलाल शर्मा, अखलेश कौशिक, रामचंद्र चौधरी सहित बड़ी संख्या मे आये लोगों ने रामेश्वर डूडी को श्रृद्धा सुमन अर्पित किऐ
जिला बचाओ संघर्ष समिति,खैरथल  को मिला भृतहरी धाम संघर्ष समिति का साथ
सरिस्का का नाम भृतहरी जी के नाम पर करने के लिए आंदोलन चला रहे संघर्ष समिति के अनूप दायमा भी खैरथल पहुचे और अपना समर्थन व सहयोग जिला बचाओं संघर्ष समिति को दिया पत्रकारों से वार्ता करते हुए दायमा सरिस्का अभ्यारण का नाम भृतहरी धाम करने ,अलवर ,थानागाजी का नाम भृतहरी नगर रखने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे अनूप दायमा अपनी टीम के साथ खैरथल जिला बचाओं संघर्ष समिति को समर्थन देने धरना स्थल पर पहूंचे दायमा ने बताया भृतहरी जी को तिजारा क्षेत्र का लोक व्यवहार पसंद नही आया था और उन्होने श्राप दिया था कि आधा रेत और आधा सोना। और इस क्षेत्र का त्याग कर भृतहरी के बीड़ को चुना वही के लोक व्यवहार को स्वीकार कर  अपनाया और तपस्या की वही उनका धाम है उस इलाके को सरीस्का नाम अग्रेजों का दिया हुआ है जिसको बदलने और भृतहरी धाम की विकास की बात हम करते है जबकि भाजपा के लोग धार्मिक और ऐतिहासिक झूठे तथ्यों के आधार पर खैरथल -तिजारा जिले का नाम बदलने पर तुली हुई  है
दो भृतहरी धाम नही हो सकते जहां भृतहरी जी का जंगल है धाम है वहीं भृतहरी जी का नाम रहेगा जब दो काशी,दो अयोध्या नही है तो भृतहरी के स्थान भी दो नही हो सकते ये सविंधान के भी विरूद्ध है हम आंदोलन के साथ है एक दूसरे के साथ खड़े रहेगे। हमारी मांग एक है
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button