बेतुल
बैतूल खेड़ली बाजार के आयुर्वेदिक अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर के खिलाफ ड्यूटी से नदारद रहने के आरोप
ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसपी से की शिकायत, कार्रवाई की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। खेड़ली बाजार के आयुष आयुर्वेदिक अस्पताल में पदस्थ डॉ. युवराज सूर्यवंशी पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर और एसपी से शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर पिछले एक वर्ष से इस अस्पताल में पदस्थ हैं, लेकिन अधिकांश वे ड्यूटी से नदारत रहते हैं। इसके बजाय वे बैतूल शहर में अपना प्राइवेट क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, जहां फीस लेकर मरीजों का इलाज करते हैं।
एसपी को दिए गए आवेदन में पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं आम आदमी पार्टी के किसान विंग के जिलाध्यक्ष ईश्वरदास साबले ने भी आरोप लगाया कि डॉ. युवराज सूर्यवंशी एक साल से पदस्थ हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी शासकीय सेवाएं नहीं दीं। उनके प्राइवेट क्लिनिक से आय अर्जित की जा रही है, जिससे शासकीय पद का दुरुपयोग हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि डॉ. सूर्यवंशी की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीण इलाज से वंचित हैं। जब स्थानीय लोगों ने डॉक्टर से ड्यूटी पर आने का आग्रह किया तो उन्होंने शासकीय कार्य में बाधा डालने की शिकायत करने की धमकी दी। ग्रामीणों के मुताबिक, डॉक्टर के इस रवैये से लोग भयभीत हैं और क्षेत्र में नाराज़गी व्याप्त है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि डॉ. युवराज सूर्यवंशी को उन्होंने पहली बार खेडली बाजार में देखा, जबकि आसपास के गांव के लोग भी उन्हें नहीं पहचानते। आरोप है कि डॉक्टर घर बैठे ही सरकारी वेतन ले रहे हैं और किसी भी मरीज का इलाज नहीं करते। शिकायत करने वालों का कहना है कि डॉक्टर ने अब आवेदक के खिलाफ बोरदेही थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी है ताकि कार्रवाई से बच सकें। इस मामले में ग्रामीणों ने जिला आयुष अधिकारी से भी शिकायत की, उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायत करने वालों में कृष्णा करोले, बबलू नायक, गणेश उपराले, नारायण माथनकर, सुरेश साहू, रवि कुमार बामने, गुलाब पंढरीनाथ, राहुल दीपचंद, राजाराम, दिलीप पंडोले, पिंटू कहार, राकेश साहू, विजय वरवड़े, प्रेमचंद साहू, बबलू सहित अनेक ग्रामीण शामिल हैं। सभी ने कलेक्टर और एसपी से निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है ताकि क्षेत्रवासियों को न्याय मिल सके और सरकारी अस्पताल में नियमित चिकित्सा सेवाएं शुरू की जा सकें।




