गाजियाबाद

लोनी में नशे की बढ़ती मांग के चलते युवा पीढ़ी का जीवन अंधकारमय

पुलिस व प्रशासन की ढुलमुल सरकारी नीति पर उठ रहे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : लोनी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बढ़ती मांग को लेकर सरकार की अस्पष्ट और ढुलमुल नीति का खामियाजा अब देश के अनगिनत परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। नशे की तरफ बढ़ता युवाओं का रुझान एक गंभीर सामाजिक संकट का संकेत बन चुका है, जिसकी वजह से परिवारों से लेकर समाज की बुनियाद तक प्रभावित हो रही है। युवा पीढ़ी का तेजी से नशे की गिरफ्त में आना अभिभावकों की चिंता को स्वाभाविक रूप से बढ़ा रहा है।
आज का युवा वर्ग सिर्फ शराब या ड्रग्स ही नहीं, बल्कि तंबाकू उत्पाद, विभिन्न नशीले पदार्थों और यहां तक कि तकनीकी लत—स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग—का भी शिकार होता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रकार की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्तर पर विनाशकारी प्रभाव छोड़ती है। इसका असर पढ़ाई, करियर, रिश्तों और भविष्य के अवसरों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
लोनी में नशे के अवैध कारोबार का जाल फैला
प्रदेश की सबसे बड़ी नगर पालिका परिषद मानी जाने वाली लोनी में नशे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। सरकारी शराब ठेकों पर मिलने वाली देशी–विदेशी शराब, गांजा और तंबाकू उत्पादों के अलावा क्षेत्र में हजारों की संख्या में फैली छोटी-बड़ी दुकानों और खोखों पर नशे से जुड़े विभिन्न मादक पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लोनी क्षेत्र के कई थाना क्षेत्रों में स्थित कॉलोनियों में अवैध रूप से ड्रग्स और मादक पदार्थों की बिक्री खुलेआम धड़ल्ले से जारी है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में भी स्थिति कम खतरनाक नहीं है, जहां बिना किसी रोकटोक के नशा युवाओं तक पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशा नियंत्रण के लिए कोई ठोस सरकारी कार्यवाही दिखाई नहीं देती, जिसके चलते नशे का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि लोनी क्षेत्र में 80 से 90 प्रतिशत युवा किसी न किसी प्रकार के नशे की चपेट में हैं, जो आने वाले समय में भयावह स्थिति का रूप ले सकता है।
नाबालिगों तक आसानी से पहुंच रहा नशा
हालांकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू का सेवन करने या खरीदने की अनुमति नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल  उलट है। अक्सर स्कूल-कॉलेज के बाहर बच्चों को खुलेआम सिगरेट, शराब या गुटका का सेवन करते देखा जा सकता है।
गुटका और तंबाकू आज युवाओं के बीच एक तरह का फैशन बन चुका है। डॉक्टर बताते हैं कि तंबाकू और गुटका का लगातार सेवन मुंह, गला और फेफड़ों की बीमारियों के साथ-साथ कैंसर का कारण बन सकता है। बावजूद इसके युवा बिना हिचक इसके आदी होते जा रहे हैं।
युवा पीढ़ी खुद धकेल रही है अपने भविष्य को खतरे में
अगर हालातों पर गौर किया जाए तो साफ दिखाई देता है कि नशे की गिरफ्त में जा रही युवा पीढ़ी अनजाने में खुद अपने भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है। देश का भविष्य युवा शक्ति पर निर्भर करता है, और यदि यही शक्ति नशे में लिप्त होती चली गई तो यह राष्ट्र के लिए एक गंभीर चुनौती बन जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशाखोरी सिर्फ व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय समस्या है, जिसे नियंत्रित करने के लिए कठोर सरकारी कदम और अभिभावक स्तर पर कड़े अनुशासन दोनों आवश्यक हैं।
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