बागपत

भ्रूण हत्या: एक घोर अपराध, और गुम होती बेटियां—समाज के सामने दोहरी चुनौती

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। कभी बेटियों को कोख में मारा गया…
और जो जन्म ले भी गईं, उनमें से कई आज गायब हो रही हैं।
यह सच्चाई जितनी कड़वी है, उतनी ही डरावनी भी—
 एक तरफ भ्रूण हत्या
 दूसरी तरफ हर साल गुम होती हजारों लड़कियां
दोनों मिलकर समाज को अंदर से खोखला कर रही हैं।
 घटता लिंगानुपात और बढ़ती गुमशुदगी
पहले ही बेटियों की संख्या कम हो चुकी है…
ऊपर से हर साल बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाएं लापता हो रही हैं—
कई मामलों में मानव तस्करी (Human Trafficking)
जबरन शादी और शोषण
घरेलू विवाद या अपराध
कुछ मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाना
 यानी जो बेटियां बचीं, वो भी सुरक्षित नहीं हैं।
 शादी के लिए तरसते घर
आज हालात ये हैं—
बेटे की शादी के लिए मां-बाप सब कुछ देने को तैयार
फिर भी रिश्ता नहीं मिल रहा
दूसरे राज्यों से बहू लाने की मजबूरी
अब यह समस्या सिर्फ भ्रूण हत्या तक सीमित नहीं रही…
 गुम होती बेटियां भी इस संकट को और गहरा कर रही हैं।
 टूटते सपने, अधूरी उम्मीदें
मां की आंखें बहू के इंतजार में नम
पिता की उम्मीदें धीरे-धीरे खत्म
बेटा समाज के तानों से परेशान
और सबसे दर्दनाक—
 दादा-दादी पोते का चेहरा देखे बिना ही दम तोड़ रहे हैं
 समाज के लिए बड़ा खतरा
महिलाओं की कमी से सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा
अपराध और शोषण के मामले बढ़ रहे
मानसिक तनाव और हिंसा में वृद्धि
आने वाली पीढ़ियों पर गहरा असर
सुरेंद्र मलानिया का वक्तव्य
“आज समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हम अपने ही किए का परिणाम भुगत रहे हैं। पहले हमने बेटियों को कोख में मारकर उनकी संख्या कम की, और अब जो बेटियां हैं, वे भी सुरक्षित नहीं हैं।
हर साल गुम होती लड़कियों की खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सिस्टम और समाज दोनों की विफलता का प्रमाण हैं। एक तरफ मां-बाप अपने बेटे की शादी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी की बेटी कहीं लापता है—यह विडंबना नहीं, एक गहरी त्रासदी है।
यह सिर्फ कानून का विषय नहीं, बल्कि हमारी सोच का भी सवाल है। जब तक हम बेटी को समान अधिकार और सुरक्षा नहीं देंगे, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।
आज जरूरत है कि हम सिर्फ ‘बेटी बचाओ’ की बात न करें, बल्कि ‘बेटी को सुरक्षित रखो’ को भी उतनी ही गंभीरता से अपनाएं। क्योंकि अगर बेटियां यूं ही गुम होती रहीं, तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।”
 अब जागना जरूरी है
 भ्रूण हत्या रोको
 बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करो
 मानव तस्करी पर सख्त कार्रवाई
 समाज में जागरूकता और सम्मान बढ़ाओ
क्योंकि सच्चाई यही है—
“जब बेटियां ही नहीं बचेंगी, तो समाज का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।”
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