पाकुड़

पाकुड़ प्रखण्ड में बालू संकट और अवैध कालाबाजारी पर सामाजिक कार्यकर्ता करेंगे आन्दोलन

Social workers will protest against sand crisis and illegal black marketing in Pakur block.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ प्रखण्ड में बालू की भारी किल्लत और अवैध कालाबाजारी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल से आने वाली बालू को जानबूझकर ऊंचे दामों पर बेचकर आम जनता के साथ-साथ सरकारी विकास योजनाओं को भी प्रभावित किया जा रहा है।
ट्रेलरों से डंपिंग कर हो रही अवैध बिक्री सुरेश कुमार अग्रवाल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बंगाल से 16 चक्का और 18 चक्का वाले बड़े ट्रेलरों के माध्यम से बालू पाकुड़ प्रखण्ड में लाई जा रही है। इस बालू को सीधे बाजार में आपूर्ति करने के बजाय ट्रैक्टरों के जरिए विभिन्न स्थानों पर डंप किया जा रहा है और बाद में निर्धारित दर से कई गुना अधिक कीमत पर अवैध रूप से बेचा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पाकुड़ प्रखण्ड में यह कालाबाजारी खुलेआम और संगठित तरीके से चल रही है।
विकास कार्य ठप, आम लोग परेशान
बालू की कृत्रिम किल्लत और आसमान छूती कीमतों के कारण पाकुड़ प्रखंड में सरकारी विकास योजनाएं और निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सड़क, भवन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का काम ठप पड़ गया है। वहीं, निजी तौर पर मकान निर्माण कराने वाले आम नागरिकों को भी बालू नहीं मिलने या अत्यधिक महंगी होने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर व्हाट्सएप, प्रिंट मीडिया और अन्य माध्यमों से कई बार प्रशासन को अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
प्रशासन को अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पाकुड़ प्रखण्ड में बालू की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही अमड़ापाड़ा और महेशपुर से उठाव होने वाली बालू को पाकुड़ प्रखण्ड के लिए भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि आपूर्ति सुचारू हो सके और कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन शीघ्र इस मामले में संज्ञान लेकर जनहित में ठोस कदम नहीं उठाता है, तो वे मजबूरन सड़क पर उतरकर “चक्का जाम” आंदोलन करने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button