बिलो टेंडर पर लिट्टीपाड़ा विधायक ने सदन में उठाए गंभीर सवाल
Littipada MLA raised serious questions in the House on below tender

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो
पाकुड़. विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में बिलो टेंडर की प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिलो टेंडर 25% से 35% तक जा रहा है, जबकि कई मामलों में यह 49% तक पहुंच रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विधायक ने कहा कि इतनी अधिक दर से बिलो में टेंडर लेने के बाद कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना संभव नहीं होता। परिणामस्वरूप निर्माण कार्य कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 49% तक बिलो में टेंडर देने की छूट कैसे दी जा सकती है और इसे रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से जनप्रतिनिधियों और सरकार की छवि धूमिल होती है। इस संबंध में अनुश्रवण एवं जांच की सख्त व्यवस्था की आवश्यकता है। विधायक ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा पूर्व में भी सदन में उठाया था, जिस पर मंत्री की ओर से पथ निर्माण विभाग की गाइडलाइन का हवाला दिया गया। यह हेमलाल मुर्मू ने सुझाव दिया कि 10% से अधिक बिलो में डाले गए संविदा प्रस्तावों को निरस्त (रिजेक्ट) करने पर सरकार विचार करे। उन्होंने यह भी कहा कि कई योजनाओं का टेंडर हो चुका है और कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन धरातल पर कार्य नहीं हो रहा है। ऐसे में न तो गुणवत्तापूर्ण कार्य संभव है और न ही वित्तीय संतुलन। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की व्यवस्था जारी रही तो सरकार को आर्थिक नुकसान होगा, बदनामी होगी और जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी। इसलिए बिलो टेंडर की प्रक्रिया पर पुनर्विचार, नियमों में संशोधन तथा सशक्त अनुश्रवण प्रणाली लागू करने की आवश्यकता है। विधायक ने विभागीय संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निचले स्तर के इंजीनियरों से उच्चस्तरीय कार्य लिया जा रहा है तथा सक्षम पदाधिकारियों की उचित पदस्थापना नहीं हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कार्यों को सही ढंग से करना है तो विभाग में योग्य और सक्षम अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी।



