गाजियाबाद

लोनी में परंपरागत आस्था और उल्लास के साथ मनाई जा रही गोवर्धन पूजा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : दीपावली के दो दिन बाद लोनी में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। लोनी के मंदिरों, गौशालाओं और घरों में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा को याद करते हुए पूजा-अर्चना की।
प्राचीन परंपरा के अनुसार, इस दिन अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें नए अन्न से बने सैकड़ों व्यंजनों का अन्नकूट तैयार किया जाता है। यह अन्नकूट भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक रूप से पूजन किया जाता है। भक्तगण इस अवसर पर गायों को भी सुसज्जित कर उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि शास्त्रों में गौवंश को देवी लक्ष्मी का स्वरूप बताया गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि  गाय सुख, समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होती हैं।
लोनी के विभिन्न क्षेत्रों — जैसे कि गुलाब वाटिका, खन्ना नगर जवाहर नगर, इंद्रापुरी और बेहटा हाजीपुर बंथला— में आज सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। जगह-जगह गोवर्धन पूजा और गौ आराधना के कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से गोबर से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाकर पूजा की, जिसके चारों ओर दीपक जलाकर वातावरण को आलोकित किया गया।
कई स्थानों पर गौ-क्रीड़ा (गायों की सजावट और परिक्रमा) के कार्यक्रम भी आयोजित हुए। बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण, राधा और गोप-गोपियों की झांकियां प्रस्तुत कर माहौल को धार्मिक उल्लास से भर दिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर पूजा में शामिल हुईं और अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, गोवर्धन पूजा उस घटना की स्मृति में मनाई जाती है जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्रदेव के कोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया था। इसीलिए इस दिन प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और समृद्धि की कामना करते हुए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।
लोनी में इस अवसर पर प्राकृतिक संरक्षण, गो-सेवा और पर्यावरण संतुलन के संदेश भी दिए गए। स्थानीय मंदिरों में श्रद्धालुओं ने गौशालाओं के लिए दान किया और पौधारोपण कार्यक्रमों में भाग लिया।
गोवर्धन पूजा के इस पावन अवसर पर शहर भक्ति, आस्था और लोक परंपरा के रंग में रंग गया है — जहां अन्नकूट की सुगंध, दीपों की रोशनी और गायों की रंभाहट ने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया है।
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