
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। सरई थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन के खिलाफ की गई तथाकथित “बड़ी कार्रवाई” अब सवालों के घेरे में है। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर पुलिस ने इसे सख्त अभियान का नाम दिया, लेकिन हकीकत यह है कि इलाके में रेत माफिया आज भी बेखौफ होकर नदियों को छलनी कर रहा है।
ग्राम जमगड़ी रेलवे पुल के पास से बिना नंबर प्लेट के एक ट्रैक्टर को अवैध रेत सहित जब्त किया गया। अपराध दर्ज कर वाहन को थाना परिसर में खड़ा करा दिया गया और इसे प्रभावी कार्रवाई बताकर प्रचारित किया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक ट्रैक्टर पकड़ लेना ही “रेत माफिया पर शिकंजा” कसने के बराबर है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई महज औपचारिकता है। रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम रेत ढोती नजर आती हैं। नदियों का अंधाधुंध दोहन जारी है, लेकिन पुलिस की सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे वाहन जब्त कर आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि बड़े नेटवर्क और असली संचालक अब भी सुरक्षित हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लाखों रुपये कीमत का बिना नंबर प्लेट का ट्रैक्टर आखिर कब से सड़कों पर दौड़ रहा था? क्या यह सब पुलिस की जानकारी के बिना संभव है? अगर अभियान वास्तव में ईमानदार है तो अब तक बड़े ठेकेदारों और कथित सरगनाओं पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अवैध रेत खनन से क्षेत्र की नदियां अपना अस्तित्व खो रही हैं। पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है और शासन को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद कार्रवाई का दायरा सीमित और प्रतीकात्मक नजर आता है।
जनता अब सीधा सवाल कर रही है—क्या यह अभियान वास्तव में माफियाओं के खिलाफ है या फिर सिर्फ सुर्खियां बटोरने की कवायद?
अब निगाहें प्रशासन और पुलिस नेतृत्व पर हैं कि क्या वे बड़े नामों तक पहुंचकर वास्तविक कार्रवाई करेंगे या फिर एक ट्रैक्टर की जब्ती को ही उपलब्धि बताकर मामले को ठंडा कर देंगे।



