बालाघाट
जिले का पहला एनएबीएच प्रमाणित चिकित्सालय बना समाधान चिकित्सालय

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जिले के लिये गौरव का विषय है कि शहर मुख्यालय स्थित समाधान हॉस्पिटल एनएबीएच प्रमाणित पहला अस्पताल बन गया है। इस अस्पताल को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स से मान्यता प्राप्त हुई है। इस संबंध में समाधान हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. अजित गनवीर ने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि एनएबीएच मान्यता महज एक प्रमाणपत्र नहीं है ये हमारी टीम की सतत गुणवत्ता सुधार व रोगी केन्द्रित सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह मान्यता इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई दिशा स्थापित करती है जिससे मरीजों को अब गुणवत्तापूर्ण देखभाल, रोगी सुरक्षा व मानकीकृत सेवाएं प्राप्त होगी। जो राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरती है। उन्होंने बताया कि अब तक जिले में किसी भी हॉस्पिटल को एनएचबीए से प्रमाणित नहीं हुआ है। इस दौरान डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे भी मौजूद रहे।
दिल्ली की टीम ने किया था सर्वे
डॉ. अजीत गनवीर ने बताया कि हॉस्पिटल में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधा व अस्पताल की गतिविधियों का दिल्ली की टीम द्वारा सर्वे किया गया। इस सर्वे टीम द्वारा समाधान हास्पिटल को एनएबीएच से प्रमाणित किया गया है। जो जिले के लिये काफी गर्व व हर्ष की बात है। उन्होंने कहा कि इस प्रमाणीकरण से ये स्पष्ट है कि अब बालाघाट जिला भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीछे नहीं है। अब बालाघाट मुंबई, दिल्ली, इंदौर, भोपाल जैसे बड़े-बड़े शहरों की बराबरी करने की क्षमता रखता है। आयुष्मान चिकित्सालय के विस्तार विस्तारीकरण को लेकर मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर वेद प्रकाश लिल्हारे ने बताया कि मरीजों को हर प्रकार का इलाज मुहैया करने के लिए चिकित्सालय में विभिन्न चिकित्सकों को भी नियुक्त किया गया है। जिसमें दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलिमा लिलहारे, डॉक्टर पलाश गणवीर स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ तरुण विजयवार फिजियोथैरेपिस्ट, डॉक्टर स्मरण ठाकुर शिशु रोग के विशेषज्ञ, डॉ सिद्धार्थ जैन ऑर्थस्कोपिक सर्जन अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आयुष्मान योजना का नहीं मिल रही राशि
इस दौरान चर्चा में डॉ. अजित गनवीर ने बताया कि शासन द्वारा आयुष्मान योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत हमारे अस्पताल में भी मरीजों के लिये सुविधा थी। लेकिन अब हम इस योजना का लाभ मरीजों को देने में अक्षम साबित हो रहे है। शासन द्वारा आयुष्मान योजना की राशि अस्पताल प्रबंधन को काफी विलंब से दी जा रही है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल प्रबंधन की करीब ५० लाख से अधिक की राशि बकाया है। आयुष्मान योजना की राशि समय पर नहीं मिलने से हमें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिससे अस्पताल प्रबंधन मरीजों को इस योजना का लाभ नहीं दे पा रहा है।



