शांति, अहिंसा, करूणा, मैत्री और मानवता का संदेश देता है धम्म ध्वज दिवस

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी/लखनऊ। विश्व धम्म ध्वज दिवस पर बौद्ध धम्म के अनुयायियों ने गुरुवार को सोशल मीडिया के सहारे बौद्ध धम्म के इतिहास, अतीत और वर्तमान की चर्चा करते हुए एक दूसरे को मंगलकामनाएं दीं। कड़ाके की ठंड के कारण बड़े कार्यक्रम नहीं हो पाए।
बौद्ध भिक्षु भंते शील वचन ने कहा कि धम्म ध्वज दिवस हमें बौद्ध धम्म की शिक्षाओं को दुनिया में फैलाने के साथ शान्ति, अहिंसा, करुणा, मैत्री और मानवता का वातावरण स्थापित करने का संदेश देता है।
विश्व बौद्ध संघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर सी बौद्ध ने धम्म ध्वज दिवस पर देशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाएं दीं और कहा कि धम्म ध्वज सम्पूर्ण विश्व को शांति, प्रज्ञा, करूणा, समता, मैत्री, प्रगति, मानववाद और समाज कल्याण की प्रेरणा देता है।
बामसेफ के जिला संयोजक और बुद्धिवादी सामाजिक चिंतक संजीव भारती ने बताया कि विश्व धम्मध्वज दिवस हर साल 8 जनवरी को मनाया जाता है। बौद्ध ध्वज को पहली बार 1885 में श्रीलंका में फहराया गया था। 08 जनवरी को विश्व ने स्वीकार किया इसे जे.आर. डी सिल्वा और हेनरी स्टील ओलकोट द्वारा डिजाइन किया गया था। 1952 में ‘वर्ल्ड फेलोशिप ऑफ बुद्धिस्ट्स’ ने इसे आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय बौद्ध ध्वज के रूप में स्वीकार किया।
इस ध्वज में 5 रंग की पट्टियाँ होती हैं, जो भगवान बुद्ध के प्रभामंडल से निकली किरणों का प्रतीक मानी जाती हैं। पांच पट्टियां आड़ी होती हैं जो सबका मिश्रित रूप हैं।
अर्थात धम्मध्वज में 6 रंग है।
नीला विश्वव्यापी शांति और दया।
पीला मध्यम मार्ग (अति से बचना)।
लाल बुद्ध के आशीर्वाद और सौभाग्य।
सफेद धर्म की शुद्धता।
नारंगी (केसरी): बुद्ध की शिक्षाओं का ज्ञान का प्रतीक है।
भंते बुद्ध वंश ने कहा कि दुनिया में 56राष्ट्रों में बौद्ध धम्म को मानने वाले लोग रहते हैं। धम्म ध्वज को दुनिया में फहराने में सम्राट अशोक और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर का महान योगदान रहा है।
भंते विश्व जीत ने बताया कि भारत के हर जिले में बौद्ध धम्म को ग्रहण करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।2021मे जनगणना न होने के कारण बौद्ध धम्म के अनुयायियों की सही संख्या का कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है।
भंते धम्म ज्योति ने कहा कि वर्तमान में दुनिया आतंकवाद और हिंसा से पीड़ित हैं। हिंसा और नफ़रत की आग में झुलस रही मानवता का कल्याण भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर चलने से ही सम्भव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जब भारत से बाहर जाते हैं तो बौद्ध धम्म और भगवान बुद्ध का गुणगान करते हैं।

