पाकुड़-बंगाल को जोड़ने वाला अन्तर्राज्यकीय फाटक बना जानलेवा जाम पॉइंट, इलाज हेतु जान जोखिम में डाल कर सड़क मार्ग से करते हैं सफर, 1C- 2C फाटक पर ROB ही एकमात्र समाधान- हिसाबी राय
The interstate gate connecting Pakur-Bengal has become a deadly jam point, people travel by road risking their lives for treatment, ROB is the only solution at 1C-2C gate - Hisabi Rai

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। काले पत्थर की नगरी के जान कहे जाने वाली तथा झारखण्ड को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाली अन्तर्राज्यकीय मालपहाड़ी सड़क पर स्थित 1C और 2C रेल फाटक अब आमजन के लिए परेशानी साबित हो रहा है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में वाहन इन गेटों / मार्ग से होकर गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं। अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी चिंताजनक स्थिति को देखते हुए ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन (ईजरप्पा) हावड़ा मंडल के प्रतिनिधियों ने इन रेलगेटों का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष हिसाबी राय, सचिव राणा शुक्ला, सह सचिव अनिकेत गोस्वामी, सिग्नल विभाग के कनिष्ठ अभियंता रणधीर पासवान और सादेकुल आलम शामिल रहे।
स्वास्थ्य संकट में भी यही रास्ता है जीवन रेखा
पाकुड़ जिला वैसे ही स्वास्थ्य व्यवस्था के मोर्चे पर जूझ रहा है। इलाज के लिए लोगों को अक्सर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होना पड़ता है और यही रास्ता उनका जीवन मार्ग बन जाता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जिस सड़क से मरीजों को अस्पताल ले जाया जाता है, वही सड़क मौत की ओर भी ले जा सकती है। हाथ से खुलते रेल फाटक, बिना चौकीदार, बिना अलार्म, यहां हर गुजरता वाहन किस्मत के सहारे ही पार कर रहा है। मरीजों को ले जा रही एंबुलेंसें भी जाम में फंसती हैं, जिससे अनमोल जीवन खोने का खतरा मंडराता है।
हादसों के आंकड़े डराते हैं
कहते हैं कि 1C और 2C दोनों रेलगेटों पर अब तक कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। टोटो, बाइक, ऑटो तकरीबन हर दिन किसी न किसी रूप में रेल लाइन पर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थिति तब बनती है जब भारी वाहन जैसे हाइवा गुजरते हैं तो बेल फाटक पर लगा हाथ संचालित फाटक से कभी – कभी टक्कर हो जाती है। रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरती 25 हजार वोल्ट की बिजली लाइन एक और बड़ा खतरा है। यह किसी भी वक्त जानलेवा साबित हो सकती है।
विभाग जिम्मेदारी से भाग रहा, आमजन भुगत रहा
निरीक्षण के दौरान सिग्नल विभाग के कनिष्ठ अभियंता रणधीर पासवान ने स्थिति पर असमर्थता जताते हुए कहा कि ये गेट उनके अधीन नहीं हैं। 1C रेलगेट इंजीनियरिंग विभाग के अधीन है, जबकि 2C WPDCL (पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की निजी मालगाड़ी लाइन के तहत आता है। यहां से प्रतिदिन औसतन 14 कोयला रेक गुजरती हैं, जिससे भीषण जाम लगता है।
ईजरप्पा ने ROB निर्माण की उठाई मांग
ईजरप्पा के अध्यक्ष हिसाबी राय ने स्पष्ट कहा है कि यह केवल यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का सवाल है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। ईजरप्पा की ओर से रेलवे मंत्रालय एवं सम्बन्धित विभागों से मांग की गई है कि दोनों रेलफाटकों पर अतिशीघ्र रोड ओवर ब्रिज (ROB) का निर्माण कराया जाए। इससे न सिर्फ आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि मरीजों के लिए इलाज का रास्ता भी आसान और सुरक्षित बनेगा। आपको बता दे पाकुड़ रेलखंड से तकरीबन पांच हजार करोड़ का राजस्व की प्राप्ति रेलवे विभाग को होता है जो तिनके के ढेर में क्षेत्रों वासियों के सुविधार्थ में यह सुविधाएं सुव्यवस्थित न होना कई सवालिया निशान अपने आप उभर कर दस्तक दे रही है। जिसे रेलवे विभाग और फायदा उठा रहे WPDCL अन्य के प्रतिनिधि के द्वारा इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए सुव्यवस्थित करने हेतु पहल करने की जरूरत है।



