हजारीबाग

अनीता कुमारी महिला सशक्तिकरण को लेकर लोगों को जागरुक किया।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
  हजारीबाग : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आर्यभट्ट साइंस कॉलेज बड़कागांव की फाउंडर एवं जीवविज्ञान की शिक्षिका अनीता कुमारी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अपनी संदेश साझा किया है। अनीता ने  महिला सशक्तिकरण के पारंपरिक ढांचों से ऊपर उठकर इस वर्ष की वैश्विक थीम राइट जस्टिस एक्शन (न्याय और क्रियान्वयन) पर जोर दिया है । अनीता कुमारी ने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज की आधी आबादी के आत्मसम्मान और उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को स्वीकार करने का दिन है। अनीता ने महिला दिवस के गौरवशाली इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस दिन की शुरुआत 1908 में न्यूयॉर्क से हुई थी जब हज़ारों महिलाओं ने काम के घंटे कम करने और वोट देने के अधिकार के लिए आवाज़ उठाई थी। जिसे  100 से भी अधिक वर्षों के बाद भी, यह दिन हमें याद दिलाता है।  लैंगिक समानता की लड़ाई अभी भी पूरी नहीं हुई है। आगे कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन महिलाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, जिन्होंने हमारे आज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंगनी रंग न्याय और गरिमा का प्रतीक है, जिसे आज हर महिला को अपने आत्मसम्मान के रूप में अपनाना चाहिए।  एक महिला के लिए अपनी पहचान बनाना कभी आसान नहीं होता है । इसके लिए समाज की रूढ़ियों, तानों और अनगिनत चुनौतियों से लड़ना पड़ता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दृढ़ निश्चय और परिवार के अटूट सहयोग को देते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता,बल्कि निरंतर प्रयास ही मंजिल तक पहुँचाते हैं। उन्होंने समाज के अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को बोझ न समझें। उन्होंने कहा, बेटियों को पाबंदियों के पिंजरे के बजाय सपनों के पंख देने की जरूरत है। यदि उन्हें सही अवसर और शिक्षा मिले, तो वे पूरा आसमान नापने का माद्दा रखती हैं। अब समय केवल अधिकारों की मांग करने का नहीं, बल्कि उन अधिकारों को धरातल पर लागू करने का है।  न्याय केवल अदालतों में नहीं, बल्कि घर के फैसलों और कार्यस्थलों के वातावरण में भी दिखना चाहिए। कहा कि जब महिलाएं एक-दूसरेन का हाथ थामती हैं, तो पूरा समाज मजबूत होता है । हर महिला के भीतर अपार शक्ति और हुनर छिपा होता है, बस उसे खुद को पहचानने की जरूरत है।
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