
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
हापुड़। पिलखुवा थाना क्षेत्र में करीब छह वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के गंभीर मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम, हापुड़ ज्ञानेंद्र सिंह यादव की अदालत ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पर अलग-अलग धाराओं में कुल 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए एक लाख रुपये प्रतिकर राशि दिए जाने का आदेश जारी किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मामला पिलखुवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। इस प्रकरण में आरोपी अभिषेक उर्फ पन्नू पुत्र सुनील उर्फ बालकिशोर के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 358/2026 दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार जुलाई 2026 में करीब छह वर्षीय बच्ची घर के आसपास खेल रही थी। आरोप है कि आरोपी बच्ची को मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ यौन अपराध किया।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य जुटाए और संबंधित दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। इसके बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य और रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) तथा पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों पर विचार किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, नाबालिग बच्ची से किए गए यौन अपराध के मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 5-एम/6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। इस कारण आरोपी को प्रभावी रूप से 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। मुकदमे के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित किए जाने का भी आदेश दिया गया है।
फैसले के बाद आरोपी का सजायाबी वारंट तैयार कर उसे सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेजने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, अदालत ने पीड़िता के हित और पुनर्वास को भी प्राथमिकता दी। पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत एक लाख रुपये प्रतिकर धनराशि दिए जाने का आदेश दिया गया है। यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हापुड़ के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
पुलिस ने बताया कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए मामलों की लगातार मॉनिटरिंग और न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जा रही है। पुलिस ने इस मामले को “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत प्रभावी पैरवी की उपलब्धि बताया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र कुमार त्यागी, विवेचक निरीक्षक नरेश कुमार, पैरोकार हेड कांस्टेबल देवेंद्र कुमार तथा कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल प्रशांत पाण्डेय की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
महज 28 दिन में मामले में फैसला आने और आरोपी को 20 वर्ष की सजा सुनाए जाने को पुलिस की प्रभावी पैरवी और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। अदालत का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में कानून की सख्ती को दर्शाता है। साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर राशि का आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि न्यायिक प्रक्रिया में पीड़िता के हितों और भविष्य को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।




