बागपत
“सेवा ही मेरा धर्म है, और समाज ही मेरा परिवार”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत।
प्रश्न (सुरेंद्र मलानिया): अंजू जी, आप कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी हैं और लगातार समाज सेवा कर रही हैं। इस सफर की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर (अंजू खोखर):
देखिए, समाज सेवा मेरे लिए कोई काम नहीं, बल्कि मेरे जीवन का उद्देश्य है। बचपन से ही मैंने अपने आसपास लोगों की समस्याएं देखीं—कहीं भूख, कहीं बीमारी, कहीं बेटियों के साथ भेदभाव। तभी मन में एक भावना जगी कि अगर ईश्वर ने मुझे कुछ करने की शक्ति दी है, तो उसका उपयोग दूसरों के लिए होना चाहिए।
यहीं से मेरा यह सफर शुरू हुआ… और आज तक चल रहा है।
प्रश्न: आप महाराजा सूरजमल संगठन (MSS), अखिल भारतीय जाट महासभा, तवर स्वच्छ पर्यावरण और श्री श्याम रसोई सेवादार ट्रस्ट जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर हैं। इतने बड़े दायित्व को कैसे निभाती हैं?
उत्तर:
यह सब अकेले संभव नहीं है। यह टीमवर्क है, विश्वास है और सबसे बड़ी बात—निस्वार्थ भावना है।
महाराजा सूरजमल संगठन और अखिल भारतीय जाट महासभा के माध्यम से मैं समाज के संगठन और जागरूकता पर काम करती हूँ।
तवर स्वच्छ पर्यावरण के जरिए हम लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं।
और श्री श्याम रसोई सेवादार ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराना… यह मेरे दिल के सबसे करीब है।
जब किसी भूखे को खाना मिलता है और उसके चेहरे पर संतोष दिखता है, वही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।
प्रश्न: समाज सेवा के इस रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
उत्तर:
सबसे बड़ी चुनौती होती है—लोगों की सोच बदलना।
कई बार लोग कहते हैं “क्या मिलेगा ये सब करके?”
लेकिन मैं हमेशा कहती हूँ—“जो सुकून सेवा में है, वो कहीं और नहीं।”
एक महिला होने के नाते भी कई बार कठिनाइयाँ आईं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। क्योंकि मुझे पता था कि मैं सही रास्ते पर हूँ।
प्रश्न: आपके जीवन का कोई ऐसा अनुभव जो आज भी आपको भावुक कर देता हो?
उत्तर:
बहुत से पल हैं… लेकिन एक घटना आज भी दिल को छू जाती है।
एक बार ठंड के समय हमने गरीबों को भोजन और कपड़े बांटे। एक बुजुर्ग महिला मेरे पास आईं, उन्होंने मेरे हाथ पकड़कर कहा—
“बेटी, आज तूने भगवान का रूप दिखा दिया।”
उस दिन मुझे लगा कि शायद मैं सच में अपने जीवन का उद्देश्य समझ पाई हूँ… और मेरी आंखों में आंसू आ गए।
प्रश्न: आज की युवा पीढ़ी को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर:
मैं युवाओं से कहना चाहती हूँ—
मोबाइल और सोशल मीडिया से बाहर निकलकर समाज को भी देखें।
अगर हर युवा एक जरूरतमंद की मदद करने का संकल्प ले ले, तो समाज अपने आप बदल जाएगा।
देश का भविष्य युवा हैं… और अगर युवा जागरूक होंगे, तो समाज मजबूत होगा।
प्रश्न सुरेंद्र मलानिया: आपके जीवन का मूल मंत्र क्या है?
उत्तर (मुस्कुराते हुए):
“नेकी कर, दरिया में डाल… और बिना किसी अपेक्षा के सेवा करते रहो।”
सुरेंद्र मलानिया का वक्तव्य:
अंजू खोखर जैसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं। आज जब लोग स्वार्थ में उलझे हुए हैं, वहां अंजू जी निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में लगी हुई हैं।
उनका यह समर्पण न केवल समाज को दिशा देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
अंजू खोखर की कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो समाज को जोड़ती है, सहारा देती है और इंसानियत को जिंदा रखती है।
ऐसे लोग ही असली मायनों में समाज के “अनसुने हीरो” होते हैं।



