
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : झारखंड उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि अदालत की अनुमति के बिना किसी भी अंतिम परीक्षा परिणाम (Final Results) को जारी नहीं किया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने पारित किया। यह फैसला सिकेंद्र मुर्मू बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिससे राज्य के शिक्षा तंत्र में हलचल मच गई है।अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि इस मामले में फाइनल रिजल्ट तब तक प्रकाशित नहीं किए जाएंगे, जब तक कोर्ट से इसकी अनुमति (Leave of the Court) नहीं मिल जाती।इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए काउंटर एफिडेविट दाखिल करे। अदालत ने इस मामले को चार सप्ताह बाद एक अन्य संबंधित केस W.P.(S) No. 2656 of 2023 के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। संभावना है कि अगली सुनवाई अप्रैल 2026 के मध्य में होगी। सुनवाई के दौरान कौन रहे मौजूद? याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रंजन प्रसाद राम ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से मुन्ना लाल यादव और दीपक कुमार उपस्थित हुए। हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा असर राज्य में चल रही भर्ती और परीक्षा प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। अब बिना न्यायालय की मंजूरी के परिणाम जारी करना संभव नहीं होगा, जिससे पारदर्शिता और प्रक्रिया की वैधता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।




