बागपत

 बागपत में विधवा से धोखाधड़ी का आरोप

ससुर की जमीन हड़पने का मामला, प्रशासन पर भी उठे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
 बागपत : बागपत जनपद के तहसील क्षेत्र के गांव शिकोहपुर से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक विधवा महिला ने अपनी ही सास, राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार पर मिलीभगत कर उसकी कृषि भूमि हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने इस संबंध में जिलाधिकारी बागपत को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम शिकोहपुर निवासी पीड़िता मंजू, जो एक गृहिणी हैं, ने बताया कि उनके पति का लगभग 23 वर्ष पूर्व निधन हो चुका था। हाल ही में 28 जनवरी 2026 को उनके ससुर स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह का भी देहांत हो गया।पीड़िता का आरोप है कि ससुर की मृत्यु के बाद उनकी सास राजबाला ने चालाकी और साजिश के तहत राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर ससुर के नाम दर्ज कृषि भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया। इतना ही नहीं, अपनी पोती को अपनी पुत्री बताकर राजस्व अभिलेखों में गलत तरीके से नाम दर्ज करा लिया गया।पीड़िता ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि राजस्व निरीक्षक (सुहाग) हल्का सरूरपुर कला और तहसीलदार बागपत ने सास के साथ सांठगांठ कर यह फर्जीवाड़ा किया।कथित रूप से खाता संख्या 00142 व 00144 से जुड़ी कई खसरा संख्या वाली कृषि भूमि को गलत तरीके से नामांतरण कर दिया गया।
 पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप
मंजू का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया गया। यहां तक कि उन्हें उक्त भूमि से बेदखल कर दिया गया।पीड़िता ने बताया कि वह पहले भी कई बार राजस्व विभाग और तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दे चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अधिकारी प्रभाव में आकर शिकायतों को दबा रहे हैं।अब पीड़िता ने जिलाधिकारी बागपत से निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और अपनी वैध कृषि भूमि पर पुनः अधिकार दिलाने की मांग की है।यह मामला न सिर्फ पारिवारिक विवाद का है, बल्कि इसमें प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।बागपत में सामने आया यह मामला बताता है कि किस तरह एक विधवा महिला को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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