नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत/मेरठ : जनपद बागपत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम की लगातार कार्रवाई ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। बीते कुछ दिनों में अलग-अलग विभागों में हुई गिरफ्तारियों ने यह साफ संकेत दिया है कि रिश्वतखोरी अब छिपी नहीं रह पा रही है।
मुख्य गन्ना अधिकारी रंगे हाथ गिरफ्तार
सबसे चर्चित मामला बागपत शुगर मिल से सामने आया, जहां मुख्य गन्ना अधिकारी (CCO) राजदीप बालियान को मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने एक तौल लिपिक से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
बताया जा रहा है कि गन्ना तौल से जुड़े काम में सुविधा देने के नाम पर यह रिश्वत मांगी जा रही थी। टीम ने पहले से शिकायत मिलने पर जाल बिछाया और मौके पर ही आरोपी को पकड़ लिया।
खेकड़ा तहसील में SDM ड्राइवर की गिरफ्तारी
इसके बाद खेकड़ा तहसील में भी बड़ा खुलासा हुआ, जहां SDM के निजी ड्राइवर निशु त्यागी को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।
यह रकम एक जमीन संबंधी मामले में सेटिंग कराने के नाम पर मांगी गई थी। इस घटना ने तहसील स्तर पर कामकाज की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले बड़ौत तहसील में भी एंटी करप्शन टीम ने नायब तहसीलदार के पेशगार को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक तंत्र के कई स्तरों पर भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ है।
बड़ा सवाल: क्या कर्मचारी अकेले कर रहे हैं भ्रष्टाचार?
इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा और अहम सवाल यही उठता है कि क्या ये कर्मचारी अकेले ही रिश्वतखोरी कर रहे हैं?
विशेषज्ञों और आम लोगों का मानना है कि:
किसी भी सरकारी कार्यालय में निचले स्तर का कर्मचारी बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के इतनी बड़ी रकम की मांग नहीं कर सकता।
अक्सर रिश्वतखोरी एक संगठित तंत्र (System) के रूप में काम करती है, जिसमें हिस्सेदारी ऊपर तक जाती है।
“ड्राइवर”, “पेशगार” या “लिपिक” जैसे पद आमतौर पर मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाते हैं, जो सीधे जनता से पैसे लेते हैं।
ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि:
ऊपर बैठे अधिकारियों की मौन सहमति या दबाव हो सकता है
या फिर कर्मचारी “नाम” बड़े अधिकारियों का लेकर लोगों से पैसे वसूलते हैं
सिस्टम की हकीकत और सुधार की जरूरत
इन लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने यह साबित कर दिया है कि:
भ्रष्टाचार अब “इक्का-दुक्का” मामला नहीं, बल्कि एक गहरे जड़ें जमा चुका नेटवर्क बन चुका है
आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत देने को मजबूर होना पड़ता है
क्या होने चाहिए कदम?
सिर्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे चैन की जांच हो
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच हो
सरकारी दफ्तरों में ऑनलाइन सिस्टम और पारदर्शिता बढ़ाई जाए
शिकायत करने वालों को सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया जाए
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रहे इन मामलों से आम जनता में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि जब तक “ऊपर तक बैठे जिम्मेदार लोगों” पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता।
बागपत में एंटी करप्शन टीम की यह मुहिम फिलहाल जारी है, और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।



