बागपत

 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट से घुटनों के दर्द को कहें अलविदा

फिर से पाएं आसान और सक्रिय जिंदगी

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत। बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र और अनियमित दिनचर्या के कारण आज बड़ी संख्या में लोग घुटनों के पुराने दर्द से जूझ रहे हैं। यह दर्द धीरे-धीरे इतना गंभीर हो जाता है कि व्यक्ति के लिए रोजमर्रा के सामान्य कार्य जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना, उठना-बैठना या यहां तक कि पालथी मारकर बैठना भी बेहद कठिन हो जाता है।
शुरुआती चरण में फिजियोथेरेपी, दवाइयों और जीवनशैली में सुधार से कुछ राहत जरूर मिलती है, लेकिन जब समस्या अधिक बढ़ जाती है तो ये उपाय सीमित प्रभाव ही छोड़ पाते हैं। ऐसे में आधुनिक चिकित विज्ञान ने एक अत्याधुनिक समाधान के रूप में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को सामने रखा है, जो सटीकता, सुरक्षा और बेहतर परिणामों के लिए जानी जा रही है।
इस संबंध में Medanta Hospital नोएडा के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डायरेक्टर Dr. Sanjay Gupta ने बताया कि घुटनों का दर्द कई कारणों से हो सकता है, जिनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस, चोट, मोटापा और उम्र से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। इसके सामान्य लक्षणों में लगातार दर्द, सूजन, जकड़न, चलने या सीढ़ियां चढ़ने में तकलीफ और दैनिक कार्यों में बाधा शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि यदि थोड़ी दूरी चलने पर ही दर्द होने लगे, घुटनों से आवाज आने लगे, सुबह लंबे समय तक जकड़न बनी रहे या बार-बार पेनकिलर लेने की जरूरत पड़े, तो यह संकेत है कि व्यक्ति को तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। जब दर्द इतना बढ़ जाए कि बिना सर्जरी के राहत संभव न हो, तब नी रिप्लेसमेंट एक प्रभावी विकल्प बन जाता है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में सर्जन को अत्याधुनिक तकनीक की मदद मिलती है, जिससे घुटने के जोड़ की रियल-टाइम मैपिंग की जाती है। इसके आधार पर हड्डियों की कटिंग और इम्प्लांट की पोजिशनिंग बेहद सटीक तरीके से की जाती है। यह सर्जरी पूरी तरह रोबोट द्वारा नहीं की जाती, बल्कि सर्जन के नियंत्रण में रोबोट एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करता है, जिससे त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।
इस आधुनिक तकनीक के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं—
सर्जरी में अधिक सटीकता
आसपास के टिश्यू को कम नुकसान
दर्द और सूजन में कमी
ब्लड लॉस कम
इम्प्लांट की लंबी आयु और बेहतर कार्यक्षमता
इसके अलावा मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। अधिकतर मरीज सर्जरी के अगले ही दिन चलने लगते हैं और कुछ ही समय में अपनी सामान्य गतिविधियां जैसे टहलना, साइक्लिंग और हल्की एक्सरसाइज शुरू कर सकते हैं।कई लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि रोबोटिक सर्जरी में मशीन ही पूरी प्रक्रिया करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि सर्जन ही पूरी सर्जरी को नियंत्रित करता है और रोबोट सिर्फ उसकी सटीकता को बढ़ाने में मदद करता है। इस कारण यह तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम देने में सक्षम है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घुटनों का पुराना दर्द व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, तो समय रहते ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर लिया गया निर्णय न केवल दर्द से राहत दिला सकता है, बल्कि व्यक्ति को फिर से एक सक्रिय, स्वतंत्र और खुशहाल जीवन जीने का अवसर भी देता है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button