गाजियाबाद

लोनी में सरकारी दफ्तर खुला है या ‘गाजियाबाद में शाखा’ चल रही है?”

अधिकारी की गैरहाजिरी से जनता परेशान, राशन और गैस शिकायतों का नहीं हो रहा निस्तारण 

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी नगरपालिका परिषद कार्यालय में क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी का दफ्तर तो मौजूद है, लेकिन वहां अधिकारी की मौजूदगी किसी पहेली से कम नहीं है। अधिकांश दिनों में उनकी कुर्सी खाली नजर आती है, जो खुद उनकी अनुपस्थिति की कहानी बयां करती है। जब भी फरियादी कार्यालय पहुंचकर कर्मचारियों से अधिकारी के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें एक ही जवाब मिलता है “साहब गाजियाबाद गए हैं।” अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब अधिकारी कार्यालय में आते ही नहीं, तो फिर हर बार गाजियाबाद कैसे चले जाते हैं। फरियादी प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में अपनी समस्याओं को लेकर लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला यहां कोई नहीं है। खासतौर पर राशन कार्ड और गैस सिलेंडर आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को लेकर लोग बुरी तरह से परेशान हैं। पवन नामक एक शिकायतकर्ता ने बताया कि वह पिछले पंद्रह दिनों से लगातार क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी से मिलने के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे यही बताया जाता है कि साहब गाजियाबाद गए हुए हैं। इससे पहले भी जब इस संबंध में क्षेत्रीय खादय अधिकारी से सवाल किया गया था, तो अधिकारी ने बताया था कि उनके पास शासन की महत्वपूर्ण योजना आईजीआरएस का अतिरिक्त प्रभार है, जिसके चलते उन्हें जिला पूर्ति कार्यालय में अधिक समय देना पड़ता है।
हाल ही में फोन पर संपर्क करने पर अधिकारी ने कहा कि देशभर में गैस आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें बढ़ने के कारण वह जिला आपूर्ति कार्यालय में व्यस्त हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि लोनी का यह कार्यालय आखिर किसके भरोसे चल रहा है और स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान कौन करेगा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधिकारी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक कार्यालय में बैठकर जनसमस्याओं को सुनें और उनका निस्तारण करें। लेकिन जब अधिकारी ही कार्यालय में मौजूद नहीं रहते, तो इन निर्देशों का पालन कैसे हो पाएगा। स्थिति यह है कि पूर्ति निरीक्षक ही क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के कर्तव्यों का निर्वहन करते नजर आते हैं।
अधिकारी की अनुपस्थिति का सीधा असर कार्यालय के कामकाज पर पड़ रहा है। अधीनस्थ कर्मचारी भी निरंकुश होते जा रहे हैं और लंबित मामलों व जन शिकायतों के निस्तारण में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों को जहां बेहतर सुविधा और सुनवाई की उम्मीद होती है, वहीं इस कार्यालय में उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद उच्च अधिकारी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी खानापूर्ति में दबकर रह जाएगा।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button