
नई दिल्ली : बता दें कि आईएडीटी के तहत एक डमी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के भारी विमान या हेलीकॉप्टर से कई किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान यह परखा जाता है कि पैराशूट तय समय पर सही क्रम में और बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के खुलते हैं या नहीं। हाल ही में हुए आईएडी टू परीक्षण की सफलता यह साबित करती है कि इसरो का पैराशूट और रिकवरी सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद है और भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में सक्षम है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 10 अप्रैल को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट पूरा किया। इस टेस्ट में, एक नकली क्रू मॉड्यूल (वह कैप्सूल जिसमें अंतरिक्ष यात्री मानव उड़ान के दौरान पृथ्वी पर वापसी और लैंडिंग के समय बैठते हैं) को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा लगभग 3 ‘े की ऊंचाई तक ले जाया गया और श्रीहरिकोटा तट के पास समुद्र में एक तय ड्रॉप जोन के ऊपर छोड़ दिया गया। इस नकली क्रू मॉड्यूल का वजन लगभग 5.7 टन है, जो पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन में इस्तेमाल होने वाले क्रू मॉड्यूल के वजन के बराबर है।
बता दें कि आईएडीटी के तहत एक डमी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के भारी विमान या हेलीकॉप्टर से कई किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान यह परखा जाता है कि पैराशूट तय समय पर सही क्रम में और बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के खुलते हैं या नहीं। हाल ही में हुए आईएडी टू परीक्षण की सफलता यह साबित करती है कि इसरो का पैराशूट और रिकवरी सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद है और भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में सक्षम है। सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग 100 करोड़ आवंटित किए हैं। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में है और पहली मानव युक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है।
आपको बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को इसरो के अध्यक्ष वी नारायण ने कहा था कि मानव रहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। स्मार्ट स्पेसक्राफ्ट मिशन आॅपरेशंस पर दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम पहले मानव रहित गगनयान मिशन से ठीक पहले मिल रहे हैं। यह कोई साधारण मिशन नहीं बल्कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन है। अंतिम मानव युक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानव रहित मिशन होंगे। पहले मिशन की सभी गतिविधियां अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई है।



