
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता एयरपोर्ट जाते समय उनके वाहन की केंद्रीय बलों ने जांच करने की कोशिश की।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता एयरपोर्ट जाते समय उनके वाहन को केंद्रीय बलों ने रोककर जांचने की कोशिश की। एक चुनावी रैली के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय बलों में हिम्मत है तो वे उनकी गाड़ी की रोज जांच कर सकते हैं। ममता बनर्जी ने कहा आज जब मैं कोलकाता एयरपोर्ट जा रही थी, तब केंद्रीय बलों ने मेरी कार की जांच करने की कोशिश की। अगर हिम्मत है तो रोज मेरी कार चेक करो।
पहले भी लग चुके हैं आरोप-गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने पार्टी नेताओं के वाहनों की कड़ी और दखल देने वाली जांच के आदेश दिए हैं। इस पूरे विवाद के बीच राज्य में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है और टीएमसी तथा केंद्र सरकार के बीच टकराव फिर सामने आता दिख रहा है।
टीएमसी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप-तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने 14 अप्रैल की अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से पुलिस, पर्यवेक्षकों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (उअढऋ) को निर्देश दिए गए हैं कि वे टीएमसी नेताओं और उनके परिजनों के वाहनों की विशेष रूप से जांच करें और उन्हें निशाना बनाएं।
टीएमसी ने यह भी दावा किया कि उनके पास व्हाट्सऐप संदेशों के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं, जिनमें कथित तौर पर पुलिस और चुनाव पर्यवेक्षकों को पार्टी की चुनावी गतिविधियों और प्रचार अभियानों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक ह्लपूर्व-नियोजित और पक्षपातपूर्ण अभियानह्व की ओर इशारा करता है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग और उसके अधिकारी निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहे हैं और पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी टीएमसी ने आरोप लगाया था कि उसके सांसद अभिषेक बनर्जी सहित कई नेताओं के वाहनों की अनावश्यक और लक्षित जांच की जा रही है। टीएमसी ने इसे चुनिंदा उत्पीड़न करार देते हुए सवाल उठाया कि जब भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव प्रचार के लिए राज्य में आते हैं, तो उन पर इसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं होती।



